रूपिन पास ट्रेक
शिमला (डोडरा क्वार) से किन्नौर, हिमाचल प्रदेश
इस फ़ोन पर बिना नेटवर्क के खुलेगा, नक्शे की फ़ाइल और सूची के साथ। ऑफ़लाइन सहेजे गए →
- सबसे ऊँचा बिंदु
- 4,650 मी
- दिन
- 7 दिन
- दूरी
- 40 किमी
- कठिनाई
- कठिन
पाँच दिन की ट्रेकिंग, जिसमें लगभग 2,300 मी से 4,650 मी ऊँचे दर्रे तक चढ़ाई है; रास्ते में बर्फ़ के पुल और नदी पार करना, दर्रे के नीचे एक खड़ी गली जहाँ पत्थर गिरते रहते हैं, और 10-11 घंटे का दर्रा पार करने वाला दिन, जिसके बाद सांगला तक घुटनों पर भारी पड़ने वाली लंबी उतराई है।
तस्वीरें
रास्ते की झलक
रास्ता
दिन-ब-दिन
दिन 1
शिमला → जिस्कुन
2,206 मी → 2,326 मी
दिन 2
जिस्कुन → झाका
2,326 मी → 2,669 मी
दिन 3
झाका → सरुवास थाच
2,669 मी → 3,283 मी
दिन 4
सरुवास थाच → धांदेरस थाच
3,283 मी → 3,566 मी
दिन 5
धांदेरस थाच → अपर वॉटरफ़ॉल कैंप
3,566 मी → 4,046 मी
दिन 6 · सबसे ऊँचा बिंदु
अपर वॉटरफ़ॉल कैंप → रोंटी गाड (रूपिन पास होकर)
4,046 मी → 4,650 मी → 3,964 मी
दिन 7
रोंटी गाड → सांगला (सांगला कांडा होकर; फिर गाड़ी से शिमला)
3,964 मी → 2,650 मी
चढ़ाई और उतराई
ऊँचाई का ग्राफ़
कहाँ है
नक्शा
सिर्फ़ शुरुआत और सबसे ऊँची जगह के निशान — पूरा रास्ता नहीं। इसे किसी अच्छे नक़्शे के साथ ही इस्तेमाल करें।
मौसम
रास्ते पर अगले 5 दिन का मौसम
ट्रेक शुरू होने की जगह और सबसे ऊँची जगह का ताज़ा पूर्वानुमान। पहाड़ में मौसम जल्दी बदलता है — निकलने वाले दिन सुबह फिर से देखें।
शुरुआत · जिस्कुन (बावटा)
2,326 मी परपूर्वानुमान आ रहा है…
सबसे ऊँची जगह · रूपिन पास
4,650 मी परपूर्वानुमान आ रहा है…
हर दिन: अधिकतम / न्यूनतम °C · बारिश मिमी और संभावना · बर्फ़ सेमी · हवा किमी/घंटा
मौसम का डेटा: ओपन-मीटियोयह कंप्यूटर मॉडल का अनुमान है, सरकारी चेतावनी नहीं। चेतावनी के लिए मौसम विभाग (IMD) और स्थानीय प्रशासन की सूचना मानें।
यात्रा की तैयारी
कैसे पहुँचें
- ट्रेलहेड
- जिस्कुन (बावटा) (नज़दीकी क़स्बा: रोहड़ू)
- नज़दीकी रेलवे स्टेशन
- शिमला (कालका-शिमला लाइन); ब्रॉड-गेज ट्रेनों के लिए कालका
- नज़दीकी हवाई अड्डा
- शिमला (जुब्बड़हट्टी) हवाई अड्डा; ज़्यादा उड़ानों के लिए चंडीगढ़ अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा
- सड़क से
- शिमला (ठियोग, कोटखाई, रोहड़ू, चिड़गांव और चांशल पास होते हुए जिस्कुन तक लगभग 191 किमी); आख़िर में सांगला से शिमला (करछम और रामपुर होते हुए लगभग 215 किमी)
- गाड़ी से
- शिमला से लगभग 10 घंटे
यात्रा की तैयारी
परमिट और शुल्क
हम किसी सरकारी स्रोत से मौजूदा परमिट नियम और शुल्क पक्का नहीं कर पाए। जाने से पहले स्थानीय वन विभाग या पर्यटन कार्यालय से पूछ लें।
यात्रा की तैयारी
ख़र्च
ख़ुद से
₹10,000–18,000
ऑपरेटर के साथ
₹17,000–24,000
प्रति व्यक्ति, शिमला से। अक्टूबर 2026 में प्रकाशित गाइडेड क़ीमतें, जिस्कुन से: इंडियाहाइक्स ₹17,750 और शिमला से आने-जाने के ट्रांसपोर्ट के ₹4,850 अलग; ट्रेक द हिमालयाज ₹17,500 + 5% GST; ट्रेकअप इंडिया ₹16,750 + 5% GST; बिकट एडवेंचर्स ₹16,650 + 5% GST। सेल्फ़-गाइडेड ख़र्च चार लोगों के समूह के लिए अनुमान है: शिमला-जिस्कुन और सांगला-शिमला बस या शेयर्ड टैक्सी, छह दिन के लिए स्थानीय गाइड और पोर्टर या खच्चर, टेंट और स्टोव का किराया, खाना, और वन शुल्क।
सामान
इस ट्रेक के लिए सबसे ज़रूरी सामान
इस रास्ते पर सबसे ज़्यादा काम आने वाला सामान, इसकी ऊँचाई, मौसम और ख़तरों के हिसाब से चुना गया।
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विज्ञापन · एफ़िलिएट लिंकबालाक्लावा (चेहरा ढकने वाली ऊनी टोपी)
ज़रूरी4,500 मी से ऊपर: गर्मी में भी तेज़ हवा और ठंड
दुकान वाले बटन उस दुकान पर खोज खोलते हैं, हमारा चुना हुआ कोई सामान नहीं। अमेज़न एसोसिएट के रूप में हम योग्य ख़रीदारियों से कमाई करते हैं। फ़ोटो सिर्फ़ सामान का प्रकार दिखाती हैं, कोई ख़ास प्रोडक्ट नहीं। एफ़िलिएट जानकारी
सामान की सूची
इस ट्रेक के हिसाब से: ऊँचाई, मौसम, दिन और रास्ते के ख़तरे।
34 में से 0 रख लिए
मई–जून में रास्ते पर बर्फ़: माइक्रोस्पाइक्स, गेटर और गर्म कपड़े ज़रूर रखें।
बैग में रखते ही हर चीज़ पर निशान लगाएँ।
जाने से पहले जानें
काम की बातें
- मोबाइल नेटवर्क
- जिस्कुन तक BSNL/एयरटेल/वोडाफ़ोन का कमज़ोर और रुक-रुक कर सिग्नल; सांगला के पास पहुँचने तक रास्ते पर कोई मोबाइल नेटवर्क नहीं।
- आख़िरी एटीएम
- रोहड़ू, शिमला से आते हुए रास्ते में; जिस्कुन और झाका जैसे गाँवों में सिर्फ़ नकद चलता है
- नज़दीकी अस्पताल
- सामान्य इलाज के लिए रोहड़ू का सरकारी अस्पताल (दर्रे से पहले जिस्कुन होकर वापस निकलें); गंभीर मामलों के लिए IGMC शिमला
- पानी
- पूरे रास्ते रूपिन नदी और उसकी सहायक धाराएँ, और दर्रे के बाद रोंटी गाड में धाराएँ। सारा पानी साफ़ करके या उबालकर पिएँ।
ख़ास बातें
- रूपिन का तीन स्तरों वाला झरना, जिसके नीचे धांदेरस थाच में कैंप लगता है और फिर जिसके साथ-साथ चढ़कर अपर वॉटरफ़ॉल कैंप पहुँचते हैं
- झाका, रूपिन नदी के ऊपर पहाड़ से चिपका 'लटकता गाँव'
- बर्फ़ के पुल, राता फेरी के बर्फ़ीले मैदान और 4,650 मी के दर्रे तक जाती रूपिन की खड़ी गली
- दर्रे से बर्फ़ पर फिसलते हुए नीचे उतरना, और सांगला कांडा के बुग्यालों के ऊपर किन्नर कैलाश श्रृंखला का पहला दर्शन
- सच्चा क्रॉसओवर ट्रेक: रूपिन घाटी (यमुना की ओर) से किन्नौर की बास्पा घाटी (सतलुज की ओर) तक
जोखिम
- ट्रेकिंग पर प्रतिबंध: अक्टूबर 2021 के आख़िर में किन्नौर के उपायुक्त (डिप्टी कमिश्नर) ने आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 34 के तहत किन्नौर ज़िले के सभी ट्रेकों पर ट्रेकिंग और पर्वतारोहण पर 'अगले आदेश तक' प्रतिबंध लगा दिया था, और उल्लंघन करने वालों पर क़ानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी थी (हिमाचल वॉचर, 26 अक्टूबर 2021)। इस रास्ते के आख़िरी दो दिन, रूपिन पास से रोंटी गाड और सांगला तक, किन्नौर में पड़ते हैं, इसलिए जैसा आदेश बताया गया है, वह इन पर भी लागू होता है। हमें इसे हटाने का कोई आदेश नहीं मिला। जब तक प्रतिबंध लागू है, यह ट्रेक न करें, और बुकिंग से पहले रिकांगपिओ में किन्नौर ज़िला प्रशासन से पुष्टि कर लें।
- दर्रे के नीचे रूपिन की गली खड़ी है, बड़े-बड़े पत्थरों से भरी है और यहाँ पत्थर गिरने का ख़तरा रहता है; बर्फ़ भरी होने पर क्रैम्पॉन या माइक्रोस्पाइक्स और गाइड ज़रूरी हैं
- नदी पार करना: मई-जून में बर्फ़ के पुल और सितंबर-अक्टूबर में चरवाहों के लकड़ी के लट्ठों वाले पुल ग़ायब या असुरक्षित हो सकते हैं
- सर्दियों में यह ट्रेक संभव नहीं: जस्टव्रैवल और हिमालयन हाइकर्स के अनुसार नवंबर से अप्रैल तक भारी बर्फ़ से दर्रा बंद रहता है; जल्दी गिरी बर्फ़ पतझड़ का सीज़न भी ख़त्म कर सकती है (उत्तरकाशी DDMA की 27 सितंबर 2026 की एडवाइज़री में ऊँचे रास्तों पर भारी बर्फ़बारी और हिमस्खलन के ख़तरे की चेतावनी दी गई थी, और ट्रेकअप इंडिया ने प्रभावित ट्रेकों में रूपिन पास को भी गिना था)
- जुलाई-अगस्त के मानसून में नदियाँ उफान पर होती हैं, पुल बह जाते हैं और पहुँच वाली सड़कों पर भूस्खलन होते हैं
- अपर वॉटरफ़ॉल से दर्रे तक 600 मी की चढ़ाई में ऊँचाई की बीमारी (AMS) का ख़तरा; अपर वॉटरफ़ॉल पार करने के बाद बाहर निकलने का सबसे तेज़ रास्ता दर्रा पार करके सांगला ही है
जाने से पहले जानें
सवाल-जवाब
क्या अभी रूपिन पास ट्रेक की अनुमति है?
जहाँ तक हमें पता चला है, नहीं। अक्टूबर 2021 के आख़िर में किन्नौर के उपायुक्त (डिप्टी कमिश्नर) ने आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 34 के तहत किन्नौर ज़िले के सभी ट्रेकों पर ट्रेकिंग और पर्वतारोहण पर 'अगले आदेश तक' प्रतिबंध लगा दिया था, और उल्लंघन करने वालों पर क़ानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी थी (हिमाचल वॉचर, 26 अक्टूबर 2021)। रूपिन पास से रोंटी गाड और सांगला तक की उतराई किन्नौर में है, और हमें यह प्रतिबंध हटाने का कोई आदेश नहीं मिला। जब तक प्रतिबंध लागू है, यह ट्रेक न करें; बुकिंग से पहले रिकांगपिओ में किन्नौर ज़िला प्रशासन से पता कर लें।
रूपिन पास ट्रेक कहाँ से शुरू होकर कहाँ ख़त्म होता है?
ऑपरेटर अब हिमाचल प्रदेश के शिमला ज़िले के जिस्कुन (निचले जिस्कुन को बावटा कहते हैं) से शुरू करते हैं, जो शिमला से रोहड़ू होते हुए सड़क से लगभग 191 किमी और 10-11 घंटे दूर है। पुराना रास्ता उत्तराखंड के धौला से शुरू होता था। ट्रेक किन्नौर के सांगला में ख़त्म होता है, जो शिमला से सड़क से लगभग 8 घंटे दूर है।
रूपिन पास ट्रेक के लिए सबसे अच्छा समय कौन-सा है?
बर्फ़ के पुलों, बर्फ़ीले मैदानों और बर्फ़ पर फिसलकर उतरने के लिए मध्य मई से जून, और साफ़ आसमान व पतझड़ के रंगों के लिए मध्य सितंबर से मध्य अक्टूबर। सर्दियों की बर्फ़ दर्रे को बंद कर देती है, और जुलाई-अगस्त के मानसून में नदी पार करना और सड़कें जोखिम भरी हो जाती हैं।
रूपिन पास कितना कठिन है और कितना लंबा है?
इसे मध्यम से कठिन माना जाता है। ऑपरेटर इसे 7 दिन में कराते हैं, जिसमें पाँच ट्रेकिंग दिनों में लगभग 37-44 किमी पैदल चलना होता है। सबसे कठिन दिन अपर वॉटरफ़ॉल से रोंटी गाड तक 10-11 घंटे का दर्रा पार करने वाला दिन है, जिसमें लगभग 4,650 मी तक एक खड़ी गली की चढ़ाई शामिल है।
क्या रास्ते में मोबाइल नेटवर्क और ATM है?
नेटवर्क कमज़ोर है और सिर्फ़ जिस्कुन तक मिलता है; सांगला के पास पहुँचने तक रास्ते पर बिल्कुल नहीं है। रोहड़ू के बाद कोई ATM नहीं है, और जिस्कुन व झाका जैसे गाँवों में UPI नहीं चलता, इसलिए नकद साथ रखें।
क्या रूपिन पास ट्रेक के लिए परमिट चाहिए?
वन विभाग के परमिट ज़रूरी हैं, और गाइडेड ग्रुप इन्हें पैकेज में शामिल रखते हैं। हमें मौजूदा आधिकारिक शुल्क नहीं मिला, इसलिए सेल्फ़-गाइडेड ट्रेकर निकलने से पहले वन कार्यालय से पता कर लें।
आपात स्थिति में
नेटवर्क जाने से पहले ये नंबर सेव कर लें। कॉल करने के लिए दबाएँ।
- 112हर आपात स्थितिभारत का एक ही आपातकालीन नंबर — हर राज्य में चलता है
- 108एंबुलेंस
- 1077ज़िला आपदा नियंत्रण कक्ष
आप यहाँ हैं
ज़िला: शिमला (डोडरा क्वार) से किन्नौरहिमाचल प्रदेश
- सबसे नज़दीकी अस्पताल
- सामान्य इलाज के लिए रोहड़ू का सरकारी अस्पताल (दर्रे से पहले जिस्कुन होकर वापस निकलें); गंभीर मामलों के लिए IGMC शिमला
- आख़िरी एटीएम
- रोहड़ू, शिमला से आते हुए रास्ते में; जिस्कुन और झाका जैसे गाँवों में सिर्फ़ नकद चलता है
- फ़ोन नेटवर्क
- जिस्कुन तक BSNL/एयरटेल/वोडाफ़ोन का कमज़ोर और रुक-रुक कर सिग्नल; सांगला के पास पहुँचने तक रास्ते पर कोई मोबाइल नेटवर्क नहीं।
निकलने से पहले
- किसी को अपना रास्ता और लौटने का समय बताकर जाएँ।
- फ़ोन पूरा चार्ज रखें और पावर बैंक साथ लें।
- रास्ते का ऑफ़लाइन नक्शा डाउनलोड कर लें।
- मौसम बिगड़े तो लौट आएँ — पहाड़ कहीं नहीं जाएगा।
रूपिन पास के बारे में सवाल
अभी कोई सवाल नहीं है। कुछ पूछें, जो लोग यह ट्रेक कर चुके हैं वे जवाब दे सकते हैं।
अपनी ट्रेक की तस्वीर #TreksAndTrails के साथ डालें
मैंने यह ट्रेक किया है
क्या रूपिन पास इस पेज से अलग दिखा? बताइए क्या बदला है, हम जाँच करेंगे।
जानकारी कहाँ से ली गई
स्रोत
आख़िरी जाँच:
- Rupin Pass Trek — Indiahikes
- Rupin Pass Trek — Trek The Himalayas
- Rupin Pass Trek — Bikat Adventures
- Rupin Pass Trek 2026: Best Time, Distance, Cost & Route Map — Himalaya Shelter
- Rupin Pass Trek Guide: Route, Itinerary, Best Time & Tips — JustWravel
- Rupin Pass Trek | Shimla to Sangla — Himalayan High
- Rupin Pass Trek — Trekup India
- Rupin Pass — Wikipedia
- Rupin Pass Trek 2027 - Complete Itinerary, Date, Cost, Safety tips more — Himalayan Hikers
- Trekking in Kinnaur banned after two tragedies — Himachal Watcher
फ़ोटो: Nikitaparwani, CC BY-SA 4.0; Engti, CC BY-SA 3.0; Nikitaparwani, CC BY-SA 4.0; AjitK332, CC BY-SA 4.0




