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भारत में ट्रेकिंग परमिट

उत्तराखंड, हिमाचल, सिक्किम, पूर्वोत्तर और पश्चिमी घाट में भारतीय और विदेशी ट्रेकरों को कौन से परमिट चाहिए, और वे कहाँ से मिलते हैं।

अपडेट

परमिट क्यों होते हैं

भारत के ज़्यादातर अच्छे ट्रेक किसी नेशनल पार्क, वन्यजीव अभयारण्य, आरक्षित वन या सीमावर्ती ज़िले से होकर गुज़रते हैं। परमिट से वन विभाग लोगों की संख्या सीमित रख पाता है और यह रिकॉर्ड रखता है कि रास्ते पर कौन-कौन है, जिससे ज़रूरत पड़ने पर खोज-बचाव में मदद मिलती है। सीमावर्ती इलाक़ों में इससे सरकार यह भी तय कर पाती है कि कौन कहाँ जाए।

नियम दो तरह के होते हैं, और अक्सर दोनों एक साथ लागू होते हैं:

  • वन और पार्क परमिट। ये राज्य के वन विभाग या पार्क कार्यालय से मिलते हैं। ये सब पर लागू होते हैं, भारतीय हों या विदेशी।
  • क्षेत्र परमिट। विदेशी (संरक्षित क्षेत्र) आदेश 1958 के तहत “इनर लाइन” और अंतरराष्ट्रीय सीमा के बीच की ज़मीन संरक्षित क्षेत्र है। गृह मंत्रालय (MHA) की सूची में पूरा अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मिज़ोरम, नागालैंड और सिक्किम, और हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान और उत्तराखंड के कुछ हिस्से शामिल हैं। पूर्वोत्तर के कई राज्य बाहर से आने वाले भारतीयों के लिए इनर लाइन परमिट (ILP) भी चलाते हैं।

आप जहाँ भी ट्रेक करें, अपना असली सरकारी फ़ोटो पहचान पत्र और उसकी कुछ फ़ोटोकॉपी साथ रखें। इंडियाहाइक्स अपने ट्रेकरों को बताता है कि वन विभाग उनके ट्रेक की अनुमति देने से पहले पहचान पत्र और डॉक्टर के हस्ताक्षर वाला मेडिकल सर्टिफ़िकेट माँगता है।

उत्तराखंड

उत्तराखंड के कई ट्रेक संरक्षित वन के अंदर से शुरू होते हैं या उससे होकर गुज़रते हैं। उत्तराखंड वन विभाग की वेबसाइट पर उसके तहत आने वाले पार्कों की सूची है, जिनमें नंदा देवी, फूलों की घाटी और गोविंद, और केदारनाथ अभयारण्य शामिल हैं। वेबसाइट पर ऑनलाइन बुकिंग और चोटियों पर चढ़ाई के लिए अलग से “पर्वतारोहण अनुमति” (Mountaineering Permission) सेवा भी है।

आपके लिए इसका मतलब:

  • पार्क या अभयारण्य के अंदर के ट्रेक के लिए वन विभाग की अनुमति चाहिए। जहाँ बुकिंग की सुविधा है वहाँ ऑनलाइन लें, नहीं तो ट्रेक की शुरुआत वाले वन कार्यालय से।
  • ट्रेकिंग परमिट में किसी चोटी पर चढ़ाई शामिल नहीं होती। उसके लिए पर्वतारोहण अनुमति चाहिए।
  • उत्तराखंड के सीमा से लगे कुछ हिस्से विदेशियों के लिए संरक्षित क्षेत्र हैं (नीचे देखें)।

हिमाचल प्रदेश

यहाँ नियम हर पार्क के अपने होते हैं। ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क (GHNP) इसका अच्छा उदाहरण है कि कोई पार्क कितना सख़्त हो सकता है:

  • पहले से अनुमति लिए बिना अंदर जाना मना है।
  • कोर ज़ोन के परमिट शमशी के मुख्य कार्यालय और शाइरोपा (तीर्थन घाटी) व रोपा (सैंज घाटी) के रेंज कार्यालयों से मिलते हैं।
  • कई दिन के ट्रेक करने वालों को प्रमाणित गाइड और पोर्टर रखने होंगे, और अंदर जाने से पहले रेंज अधिकारी को रास्ता मंज़ूर करना होगा।
  • हथियार, शिकार, मछली पकड़ना, पालतू जानवर और पार्टियाँ मना हैं। आग सिर्फ़ खाना पकाने के लिए जलाई जा सकती है।

पार्क के अपने पेज पर फ़ीस नहीं दी गई है, और वह आने वालों से पार्क कार्यालय से पता करने को कहता है। हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्से भी विदेशियों के लिए संरक्षित क्षेत्र हैं।

सिक्किम और पूर्वोत्तर (ILP, PAP, RAP)

तीन छोटे नाम बार-बार सामने आते हैं:

  • ILP (इनर लाइन परमिट)। राज्य के बाहर से आने वाले भारतीय नागरिकों के लिए। अरुणाचल प्रदेश के आधिकारिक पोर्टल के अनुसार भारतीय नागरिकों के लिए अरुणाचल प्रदेश जाने को eILP एक ज़रूरी दस्तावेज़ है (“is mandatory document to visit Arunachal Pradesh by Indian nationals”)। अक्टूबर 2026 तक पोर्टल पर पर्यटक eILP की फ़ीस ₹100 प्रति व्यक्ति दी गई है, और यह फ़ीस वापस नहीं होती। अस्थायी eILP ज़्यादा से ज़्यादा 30 दिन के लिए मान्य होता है। नागालैंड और मणिपुर अपने-अपने आधिकारिक ऑनलाइन ILP पोर्टल चलाते हैं।
  • PAP (संरक्षित क्षेत्र परमिट)। सिक्किम में भारतीय पर्यटकों को सोमगो झील (Tsomgo), नाथुला और उत्तर सिक्किम जैसे संरक्षित क्षेत्रों के लिए PAP दिए जाते हैं। सिक्किम टूरिज़्म के अनुसार ट्रेकिंग परमिट गंगटोक और पेलिंग के पर्यटक सूचना केंद्रों से, किसी पंजीकृत ट्रैवल एजेंसी के ज़रिए, गृह विभाग, सेना, वन विभाग और पुलिस की मंज़ूरी के बाद जारी होते हैं। नेशनल पार्क और अभयारण्यों के प्रवेश परमिट गंगटोक के वन विभाग से मिलते हैं। बच्चों के लिए उम्र की सीमा है 18, यानी इससे कम उम्र के बच्चों के लिए जन्म प्रमाणपत्र, पिता का वोटर आईडी या पासपोर्ट साथ लाएँ; उनके लिए आधार मान्य नहीं है।
  • RAP (प्रतिबंधित क्षेत्र परमिट)। सिक्किम आने वाले विदेशियों के लिए। अक्टूबर 2026 की स्थिति में सिक्किम टूरिज़्म का कहना है कि RAP मुफ़्त जारी होता है। यह 30 दिन के लिए मान्य होता है और इसे बढ़ाया जा सकता है, लेकिन कुल ठहराव 60 दिन से ज़्यादा नहीं होना चाहिए।

पश्चिमी घाट

दक्षिण के राज्य अब ज़्यादा से ज़्यादा ट्रेक स्लॉट वन विभाग के ज़रिए ऑनलाइन बेचते हैं। कर्नाटक का पोर्टल अरण्य विहार (Aranya Vihaara) है, जो कर्नाटक वन विभाग का आधिकारिक ट्रेकिंग पोर्टल है:

  • ज़िला, ट्रेक, तारीख़ और समय-स्लॉट चुनें। आप ज़्यादा से ज़्यादा 30 दिन पहले, और कम से कम एक दिन पहले बुक कर सकते हैं।
  • अपने स्लॉट से कम से कम 10 मिनट पहले शुरुआती जगह पर पहुँचें।
  • बुकिंग में इस्तेमाल किया गया असली पहचान पत्र साथ रखें, क्योंकि ट्रेक वाले दिन इसकी जाँच होती है।
  • 15 जुलाई 2026 से लागू मौजूदा नियमों के तहत, ट्रेक से 8 या उससे ज़्यादा दिन पहले रद्द करने पर 50% पैसा वापस मिलता है, और 7 दिन के अंदर रद्द करने पर कुछ नहीं मिलता।
  • पोर्टल पर दी गई वन हेल्पलाइन: 1926।

ऑनलाइन बुकिंग कुछ हद तक भीड़ की वजह से शुरू हुई। 2024 में एक सप्ताहांत पर प्रवेश काउंटरों पर करीब 1,500 ट्रेकरों की लाइन लगने के बाद कर्नाटक ने कुक्के सुब्रमण्य–पुष्पगिरि रास्ता, जिसमें कुमार पर्वत भी आता है, फ़रवरी से अक्टूबर तक बंद कर दिया। डाउन टू अर्थ ने ख़बर दी कि ट्रेक पर रोज़ाना ज़्यादा से ज़्यादा 300 लोगों को जाने दिया जाएगा, और सिर्फ़ उन्हीं जगहों पर जहाँ सरकारी ऑनलाइन बुकिंग की व्यवस्था है। गर्मियों में आग के ख़तरे और मानसून में फिसलन भरे रास्तों की वजह से रास्ते बंद हो सकते हैं, इसलिए निकलने से पहले पोर्टल देख लें।

विदेशी नागरिक

विदेशियों के लिए MHA के नियम ज़्यादा सख़्त हैं:

  • भूटान के नागरिकों को छोड़कर हर विदेशी को संरक्षित या प्रतिबंधित क्षेत्र में जाने के लिए ख़ास परमिट चाहिए।
  • पर्यटक परमिट दो या उससे ज़्यादा लोगों के ग्रुप के लिए होते हैं। अकेले विदेशी पर्यटक के परमिट के लिए पहले MHA की मंज़ूरी चाहिए।
  • परमिट सिर्फ़ उसी रास्ते और उन्हीं प्रवेश और निकास बिंदुओं के लिए मान्य है जो उस पर लिखे हैं। फ़ोटोकॉपी साथ रखें, क्योंकि हर चेक पोस्ट पर एक कॉपी देनी पड़ सकती है।
  • ग्रुप में आने वाले पर्यटक विदेश में किसी भारतीय मिशन में, या भारत पहुँचने के बाद परमिट जारी करने का अधिकार रखने वाले किसी अधिकारी के पास आवेदन कर सकते हैं।
  • अफ़ग़ानिस्तान, चीन और पाकिस्तान के नागरिकों को पहले MHA की मंज़ूरी चाहिए।

दिसंबर 2024 में MHA ने मणिपुर, मिज़ोरम और नागालैंड में संरक्षित क्षेत्र व्यवस्था फिर से लागू कर दी, इसलिए वहाँ विदेशियों को फिर से PAP चाहिए। सिक्किम में विदेशी सोमगो झील और लाचेन–लाचुंग–युमथांग–थांगू घाटी जा सकते हैं, लेकिन गुरुडोंगमार नहीं। सिक्किम टूरिज़्म के अनुसार संरक्षित क्षेत्रों के लिए विदेशियों के ट्रेकिंग परमिट गंगटोक के सिक्किम टूरिज़्म कार्यालय से मुफ़्त जारी होते हैं (अक्टूबर 2026 तक)। इसके लिए किसी सरकारी मेडिकल अधिकारी का फ़िटनेस सर्टिफ़िकेट भी चाहिए।

हम ट्रेक पेजों पर फ़ीस कैसे दिखाते हैं

परमिट की फ़ीस अक्सर बदलती रहती है, और ऑनलाइन मिलने वाले कई आँकड़े सालों पुराने हैं। हमारा नियम सीधा है:

  • हम फ़ीस तभी छापते हैं जब हमने उसे किसी आधिकारिक सरकारी पेज पर पढ़ा हो। ऐसा करते समय हम बताते हैं कि हमने उसे कब जाँचा, जैसे “अक्टूबर 2026 तक”।
  • अगर हमें कोई आधिकारिक आँकड़ा नहीं मिलता, तो ट्रेक पेज पर “स्थानीय रूप से पता करें” लिखा होता है। इसका मतलब है जाने से पहले वन रेंज कार्यालय, पार्क कार्यालय या राज्य के परमिट कार्यालय से पूछ लेना।
  • हम ब्लॉग, फ़ोरम या ऑपरेटरों की वेबसाइटों से फ़ीस कभी नहीं उठाते, चाहे वे कितनी भी सटीक लगें।

अगर आपको हमारी साइट पर कोई ऐसी फ़ीस दिखे जो अब आधिकारिक पेज से मेल नहीं खाती, तो कृपया हमें बताएँ ताकि हम उसे ठीक कर सकें।

स्रोत

  1. Ministry of Home Affairs: Frequently Asked Questions on Protected Area Permit (PAP) / Restricted Area Permit (RAP) regime
  2. Sikkim Tourism (Government of Sikkim): Protected Area Permit
  3. Sikkim Tourism (Government of Sikkim): Restricted Area Permit
  4. Government of Arunachal Pradesh: eILP information, fees and validity
  5. Government of Nagaland: Nagaland Inner Line Permit portal
  6. Government of Manipur: Manipur Inner Line Permit portal
  7. Karnataka Forest Department: Aranya Vihaara eco-tourism and trekking portal
  8. Uttarakhand Forest Department
  9. Great Himalayan National Park: Fees, Rules and Guidelines
  10. Indiahikes: Things to Take on a Himalayan Trek (documents section)
  11. The Assam Tribune: MHA reimposes protected area regime in Manipur, Nagaland and Mizoram (19 December 2024)
  12. Down To Earth: Karnataka's trekking trails in eco-sensitive Western Ghats off limits till October (1 February 2024)