भारत में मानसून ट्रेकिंग
मानसून में कहाँ ट्रेक ठीक रहते हैं, जोंक, फिसलन भरी चट्टान और अचानक आने वाली बाढ़ से कैसे निपटें, कौन से किले और झरने बंद होते हैं, और क्या साथ ले जाएँ।
अपडेट
मानसून ट्रेकिंग कहाँ अच्छी रहती है
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक़ दक्षिण-पश्चिम मानसून आम तौर पर 1 जून के आसपास केरल पहुँचता है और 8 जुलाई के आसपास पूरे देश में छा जाता है। 15 अक्टूबर के आसपास यह पूरे देश से लौट जाता है। इस साल (2026) IMD ने घोषणा की कि 15 अक्टूबर को मानसून पूरे देश से लौट चुका है।
यही तारीख़ें तय करती हैं कि आप कहाँ ट्रेक कर सकते हैं:
- पश्चिमी घाट (सह्याद्रि)। यह मानसून ट्रेकिंग का सबसे जाना-माना इलाक़ा है: हरे-भरे किले, धुंध और झरने। सबसे ज़्यादा बारिश भी यहीं होती है। IMD बताता है कि पश्चिमी घाट मानसूनी हवाओं के आगे दीवार की तरह खड़े हो जाते हैं, जिससे पश्चिमी तट पर भारी से बहुत भारी बारिश होती है। जंगल और किलों के जाने-पहचाने रास्तों पर छोटे, एक दिन के ट्रेक सबसे अच्छे रहते हैं। लंबी, खुली चोटियों की धार और नालों की तलहटी में चलना ठीक नहीं रहता।
- ऊँचे हिमालय की वर्षा-छाया वाली घाटियाँ। मुख्य पर्वत-श्रृंखला के पार की जगहों, जैसे लद्दाख और स्पीति, में बहुत कम बारिश होती है। फिर भी वहाँ तक पहुँचने वाली सड़कें भूस्खलन से कट सकती हैं, इसलिए यात्रा में कुछ दिन अतिरिक्त रखें।
- बाक़ी हिमालय। जुलाई और अगस्त में हिमालय के निचले और बीच के कई रास्ते गीले रहते हैं, बादलों से ढके रहते हैं और वहाँ भूस्खलन का ख़तरा रहता है। अगर जाएँ, तो ऐसा ट्रेक चुनें जिसके पेज पर मानसून को सबसे अच्छे महीनों में गिना गया हो, और बंद होने से जुड़े नोट ज़रूर देखें।
आप जो भी चुनें, शुरू करने से एक दिन पहले और उस दिन सुबह IMD का ज़िला-स्तर का पूर्वानुमान और कोई भी चेतावनी ज़रूर देख लें।
जोंक, फिसलन भरी चट्टान और अचानक आने वाली बाढ़
मानसून में जंगल के गीले रास्तों पर जोंक आम हैं। जोंक से सामना होने से पहले ही जान लें कि उससे कैसे निपटना है।
- उसे हटाने के लिए त्वचा को कसकर खींचें, मुँह वाले सिरे (पतले सिरे) के नीचे नाख़ून या कोई कार्ड सरकाएँ और उसे झटक दें। या इंतज़ार करें। आम तौर पर वह लगभग 30–45 मिनट में अपने आप गिर जाती है।
- उसे खींचकर न निकालें, जलाएँ नहीं, और उस पर नमक, शैम्पू या कीड़े भगाने वाली दवा न लगाएँ। हेल्थलाइन चेतावनी देता है कि इससे जोंक घाव में उल्टी कर सकती है और संक्रमण का ख़तरा बढ़ जाता है।
- काटी हुई जगह से कुछ देर तक ख़ून बहता रह सकता है। उसे साफ़ करें, उस पर पट्टी (प्लास्टर) लगाएँ, और ख़ून रुकने तक पट्टी बदलते रहें।
- अगर काटी हुई जगह लाल, गरम या दर्द भरी हो जाए या उससे पस निकले, अगर बुख़ार आए, या ख़ून ज़्यादा बहे, ख़ासकर अगर आप ख़ून पतला करने वाली दवा लेते हैं, तो डॉक्टर को दिखाएँ।
फिसलन भरी चट्टान और कीचड़। बारिश में रास्ते फिसलन भरे और कीचड़ से भरे हो जाते हैं। यही एक वजह कर्नाटक ने तब बताई थी जब उसने कुक्के सुब्रमण्य–पुष्पगिरि रास्ता, जिसमें कुमार पर्वत भी आता है, 2024 में गर्मी और बारिश के मौसम में बंद किया था। छोटे क़दम रखें, ट्रेकिंग पोल इस्तेमाल करें, जहाँ तक हो सके काई वाली चट्टान और गीली लैटेराइट पट्टियों से दूर रहें, और चट्टानी हिस्सों पर हमेशा तीन जगह से पकड़ बनाए रखें। खड़ी ढलानों पर धीरे-धीरे उतरें।
अचानक आने वाली बाढ़ और भूस्खलन। NDMA की सलाह:
- अचानक आने वाली बाढ़ नालों, पानी की निकासी वाली नालियों और खड्डों में कभी भी आ सकती है, चाहे ऊपर बारिश के बादल या भारी बारिश हो या न हो।
- अगर अचानक बाढ़ आने की आशंका हो, तो तुरंत ऊँची जगह पर चले जाएँ। किसी के कहने का इंतज़ार न करें।
- बहते पानी में से होकर न चलें। छह इंच (लगभग 15 सेमी) बहता पानी भी आपको गिरा सकता है।
- नदी का मटमैला पानी ऊपर की तरफ़ भूस्खलन का संकेत हो सकता है। पेड़ों के चटकने या पत्थरों के आपस में टकराने की आवाज़ पर ध्यान दें।
जो नाला आपने सुबह आसानी से पार किया था, वह दोपहर तक पार करने लायक़ नहीं रह सकता। अगर पानी बढ़ जाए, तो सुरक्षित किनारे पर रुककर इंतज़ार करें या लौट जाएँ।
किले और झरने: बंदी और नियम
डूबने और हादसों के बाद महाराष्ट्र के ज़िला प्रशासन अब किलों, झरनों और बाँधों के लिए मानसून के आदेश जारी करते हैं। ये क़ानूनी आदेश हैं, और इन्हें तोड़ने वालों पर कार्रवाई होती है।
- पुणे ज़िला, जुलाई 2024। लोणावला में भुशी बाँध के पास एक झरने में एक महिला और चार बच्चों के बह जाने के बाद पुणे के कलेक्टर ने आदेश जारी किए। इनका आधार था भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 और आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005। इनमें नौ तहसीलों की जगहें शामिल थीं, जैसे भुशी बाँध, टाइगर पॉइंट, लायंस पॉइंट, पवना बाँध का इलाक़ा, ताम्हिणी घाट, सिंहगढ़ किले के आसपास का इलाक़ा, माळशेज घाट, शिवनेरी किले का क्षेत्र, और भोर व वेल्हा के किलों वाले इलाक़े। इन आदेशों के तहत इन जगहों पर पाँच या उससे ज़्यादा लोगों के इकट्ठा होने, गहरे पानी में उतरने, और सेल्फ़ी व रील बनाने पर रोक थी।
- राजगढ़ तालुका, 22 जून से 30 सितंबर 2025। उप-विभागीय अधिकारी के एक आदेश में राजगढ़ और तोरणा किले, मढे घाट झरना और पानशेत, वरसगाँव व गुंजवणी बाँधों के आसपास के इलाक़े शामिल थे। इसमें तेज़ बहती नदियों में तैरने या उतरने, झरनों पर चढ़ने या उनके नीचे बैठने, शराब, तेज़ संगीत, गंदगी फैलाने, जोखिम भरी सेल्फ़ी और वीडियो बनाने, और संकरी या ख़तरनाक सड़कों पर गाड़ी खड़ी करने पर रोक थी।
- कर्नाटक। साल 2024 में वन विभाग ने कुक्के सुब्रमण्य–पुष्पगिरि रास्ता फ़रवरी से अक्टूबर तक बंद रखा। डाउन टू अर्थ ने ख़बर दी कि ट्रेक पर रोज़ाना ज़्यादा से ज़्यादा 300 लोगों को जाने दिया जाएगा, और सिर्फ़ उन्हीं जगहों पर जहाँ सरकारी ऑनलाइन बुकिंग की व्यवस्था है।
ये आदेश हर साल बदलते हैं, और नए आदेश आम तौर पर जून या जुलाई में आते हैं। मानसून ट्रेक से पहले:
- उस साल के आदेश के लिए ज़िला कलेक्टर की वेबसाइट और स्थानीय ख़बरें देखें
- वन विभाग का बुकिंग पोर्टल देखें, जैसे कर्नाटक का अरण्य विहार (Aranya Vihaara)
- बेस गाँव में लगे बोर्डों का पालन करें, भले ही आपका ग्रुप “हमेशा” किसी दूसरे रास्ते से जाता रहा हो
बारिश में कभी भी झरने के कुंड में न उतरें, गिरती धार के नीचे न बैठें, और फ़ोटो के लिए चट्टान के किनारे पर खड़े न हों।
क्या साथ ले जाएँ
हमारी गियर चेकलिस्ट देखें और उसमें ये चीज़ें जोड़ें:
- पोंचो या रेन जैकेट। इंडियाहाइक्स बताता है कि पोंचो आपको और आपके बैग, दोनों को ढक लेता है और उसका वज़न बहुत कम होता है
- बैग का रेन कवर, और बैग के अंदर कपड़े व इलेक्ट्रॉनिक सामान प्लास्टिक की थैलियों में पैक हों
- जल्दी सूखने वाली टी-शर्ट और ट्रेक पैंट (जींस या सूती नहीं), और घर लौटते समय के लिए सूखे कपड़ों का एक अतिरिक्त जोड़ा
- गहरी, मज़बूत पकड़ वाले तलवे के ट्रेकिंग जूते, और मोज़ों का एक अतिरिक्त जोड़ा
- ट्रेकिंग पोल
- जोंक के काटने, कटने-छिलने और छालों के लिए एंटीसेप्टिक, पट्टियाँ और एक छोटी फ़र्स्ट-एड किट
- हेडलैंप, ताकि नीचे उतरे बादल और बारिश की वजह से देर हो जाए तो काम आए
- पूरी तरह चार्ज फ़ोन, वॉटरप्रूफ़ पाउच में, और स्थानीय पुलिस थाने व वन कार्यालय के नंबर
जल्दी निकलें, अपने ग्रुप को साथ रखें, और लौटने का एक समय तय करें। मानसून में अक्सर सबसे सही फ़ैसला वापस लौटना ही होता है।
स्रोत
- India Meteorological Department (IMD): Monsoon Frequently Asked Questions
- India Meteorological Department (IMD): Monsoon information
- National Disaster Management Authority (NDMA): Floods Do's and Don'ts
- National Disaster Management Authority (NDMA): Landslide Do's and Don'ts
- Business Standard (PTI): Post waterfall tragedy, prohibitory orders enforced at picnic spots in Pune (3 July 2024)
- Punekar News: Tourism banned at Rajgad, Torna forts, Madhe Ghat and dam areas until 30 September (2025)
- Down To Earth: Karnataka's trekking trails in eco-sensitive Western Ghats off limits till October (1 February 2024)
- Healthline: How to Remove a Leech (medically reviewed)
- Indiahikes: Things to Take on a Himalayan Trek