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भारत में ट्रेकिंग के दौरान सुरक्षा

भारतीय रास्तों के लिए काम की सुरक्षा बातें: अपना प्लान किसी को बताना, मौसम और भूस्खलन के संकेत पहचानना, नदी पार करना, जंगली जानवर, अकेले ट्रेक करना और 112 पर कॉल करना।

अपडेट

भारत में ज़्यादातर ट्रेकिंग हादसे किसी बड़ी घटना से नहीं होते। वे गीली चट्टान पर फिसलने, रात भर में चढ़ आए नाले, बिछड़ गए ग्रुप, या देर से शुरुआत की वजह से अंधेरे में फँस जाने से होते हैं। यह गाइड उन बुनियादी बातों के बारे में है जिनसे इनमें से ज़्यादातर हादसे टाले जा सकते हैं।

किसी को अपना प्लान बताएँ

निकलने से पहले किसी ऐसे व्यक्ति को एक छोटा मैसेज भेजें जो ट्रेक पर नहीं जा रहा:

  • ट्रेक का नाम, शुरुआती जगह और रास्ता, बीच में कोई और जगह जाने का इरादा हो तो वह भी
  • आपके ग्रुप में कौन-कौन है, उनके फ़ोन नंबरों के साथ
  • आयोजक या गाइड का नाम और नंबर
  • किस दिन और किस समय तक आप वापस नेटवर्क में आ जाएँगे
  • अगर तय समय तक आपकी कोई ख़बर न मिले तो उन्हें क्या करना है (जैसे पहले आयोजक को, फिर स्थानीय पुलिस को फ़ोन करना)

फिर उसी प्लान पर चलें। अगर रास्ता बदलें, तो किसी को बताएँ। जहाँ वन विभाग की चेक पोस्ट और परमिट कार्यालय हैं, वहाँ अपना नाम दर्ज कराएँ, ताकि आपके अंदर जाने का आधिकारिक रिकॉर्ड रहे।

रास्ते पर पहाड़ी इलाक़ों के लिए NDMA की सलाह लागू होती है: अपने साथियों के साथ रहें, और अपना रास्ता नोट करते चलें ताकि जंगल में भटक न जाएँ। सीखें कि आपात स्थिति में बचाव दलों और हेलिकॉप्टरों को इशारा कैसे करते हैं।

मौसम और भूस्खलन

NDMA सलाह देता है कि पहाड़ी इलाक़ों की यात्रा मौसम विभाग या ख़बरों से मिली जानकारी के आधार पर प्लान करें। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) mausam.imd.gov.in पर ज़िला-स्तर के पूर्वानुमान, चेतावनियाँ और पहाड़ी मौसम बुलेटिन (Mountain Weather Bulletin) जारी करता है। निकलने से पहले इन्हें देखें, और सड़क के आख़िरी छोर पर सिग्नल मिले तो फिर से देखें।

जल्दी निकलें, ताकि मौसम बिगड़ने या रास्ते में उम्मीद से ज़्यादा समय लगने पर भी आपके पास दिन की रोशनी बची रहे।

भूस्खलन के चेतावनी संकेत (NDMA के अनुसार):

  • गिरते पत्थर, ज़मीन में नई दरारें, या धँसती इमारतें और सड़कें
  • नदी का मटमैला पानी, जो ऊपर की तरफ़ भूस्खलन का संकेत हो सकता है
  • अजीब आवाज़ें, जैसे पेड़ों का चटकना या पत्थरों का आपस में टकराना

अगर आपको ये संकेत दिखें, तो बिना देर किए भूस्खलन के रास्ते से हट जाएँ, या उसके नीचे की घाटी से बाहर निकल जाएँ। जो देखा, उसकी सूचना सबसे नज़दीकी तहसील या ज़िला कार्यालय को दें। NDMA यह भी सलाह देता है:

  • ढीले मलबे पर न चलें, और गिरे हुए बिजली के तारों या खंभों को न छुएँ
  • भूस्खलन के बाद नदियों या झरनों का पानी बिना साफ़ किए सीधे न पिएँ
  • किसी घायल व्यक्ति को प्राथमिक उपचार दिए बिना न हिलाएँ, जब तक कि वह तुरंत किसी ख़तरे में न हो

नदी पार करना

बहता पानी भारतीय ट्रेक पर सबसे बड़े ख़तरों में से एक है, ख़ासकर मानसून में।

NDMA की बाढ़ से जुड़ी सलाह यहाँ सीधे लागू होती है:

  • बहते पानी में से होकर न चलें। NDMA के अनुसार छह इंच (लगभग 15 सेमी) बहता पानी भी आपको गिरा सकता है।
  • अगर पार करना ही पड़े, तो वहाँ से पार करें जहाँ पानी बह नहीं रहा, और आगे की ज़मीन को एक डंडे से टटोलते चलें।
  • अचानक आने वाली बाढ़ नालों और खड्डों में कभी भी उतर सकती है, चाहे ऊपर बारिश हो रही हो या नहीं। ऊपर की तरफ़ भारी बारिश ही काफ़ी है।
  • अगर अचानक बाढ़ आने की ज़रा भी आशंका हो, तो तुरंत ऊँची जगह पर चले जाएँ। किसी के कहने का इंतज़ार न करें।

रास्ते पर इसका मतलब है:

  • एक-एक करके पार करें, और बाक़ी ग्रुप किनारे से नज़र रखे।
  • सूखे नाले की तलहटी में या नदी के पास की नीची ज़मीन पर कभी कैंप न लगाएँ।
  • अगर पार करने की जगह ठीक न लगे, तो इंतज़ार करें या लौट जाएँ। डूबने से एक दिन की देरी बेहतर है।

जंगली जानवर

जंगली जानवरों के बारे में लीव नो ट्रेस की सलाह सीधी है:

  • जानवरों को दूर से देखें। उनका पीछा न करें और उनके पास न जाएँ।
  • जानवरों को कभी खाना न खिलाएँ। इससे उनकी सेहत बिगड़ती है और वे इंसानों के पास आना सीख जाते हैं।
  • पालतू जानवरों को हर समय क़ाबू में रखें, या उन्हें घर पर ही छोड़ दें। कुछ पार्कों में, जैसे ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में, पालतू जानवर पूरी तरह मना हैं।
  • जोड़ा बनाने, घोंसला बनाने और बच्चे पालने के समय जानवरों से और ज़्यादा दूरी रखें।

खाना ऐसी जगह रखें जहाँ जानवर न पहुँच सकें, और बचा हुआ सारा खाना और जूठन अपने साथ वापस ले आएँ। जिन इलाक़ों में हाथी, भालू या तेंदुए हों, वहाँ अपने गाइड और वन विभाग के कर्मचारियों के निर्देश मानें।

अकेले ट्रेक करना

अकेले ट्रेक करने का मतलब है कि अगर आपका टख़ना मुड़ जाए या आप बीमार पड़ जाएँ, तो मदद बुलाने के लिए कोई नहीं होगा। कुछ इलाक़ों में इसकी इजाज़त ही नहीं है:

  • विदेशी पर्यटकों के लिए संरक्षित क्षेत्र परमिट (PAP) दो या उससे ज़्यादा लोगों के ग्रुप के लिए होते हैं।
  • ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में कई दिन के ट्रेक करने वालों को प्रमाणित गाइड और पोर्टर रखने होंगे।
  • कई रास्तों पर अब स्थानीय गाइड या ऑनलाइन बुकिंग ज़रूरी है। ट्रेक का पेज और परमिट कार्यालय से पता करें।

अगर फिर भी अकेले जाएँ:

  • स्थिर मौसम में कोई ऐसा रास्ता चुनें जिस पर लोग ख़ूब आते-जाते हों, और यह आपका पहला ट्रेक न हो।
  • पूरा, विस्तार से प्लान किसी को देकर जाएँ, और घर पर किसी के साथ हालचाल देने का एक समय तय कर लें।
  • पावर बैंक, हेडलैंप, सीटी, एक गरम कपड़ा और अतिरिक्त खाना साथ रखें।
  • जल्दी लौट आएँ। शाम ढलते समय अकेले आगे बढ़ते रहने से ही छोटी परेशानियाँ बचाव अभियान बन जाती हैं।

आपातकालीन नंबर

112 डायल करें। यह पुलिस, फ़ायर और एम्बुलेंस के लिए भारत का एकल आपातकालीन नंबर है, जो हर राज्य की आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली (ERSS) के ज़रिए चलता है। ERSS के आधिकारिक FAQ के अनुसार:

  • 112 सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में काम करता है, और कॉल मुफ़्त है।
  • आप इस तक फ़ोन कॉल, SMS, ईमेल, 112 India ऐप, या अपने फ़ोन के पैनिक बटन से पहुँच सकते हैं। स्मार्टफ़ोन पर पावर बटन तीन बार जल्दी-जल्दी दबाने से कॉल सीधे 112 पर लगती है।
  • FAQ के अनुसार, आपके अपने ऑपरेटर का नेटवर्क न होने पर भी आप मोबाइल से 112 पर कॉल कर सकते हैं।
  • अगर आपको स्थानीय भाषा नहीं आती, तो आप अंग्रेज़ी या हिंदी में बात कर सकते हैं।

दूर-दराज़ की घाटियों में अक्सर किसी भी नेटवर्क का सिग्नल नहीं होता, इसलिए अपने फ़ोन के भरोसे न रहें। ज़रूरत पड़ने से पहले ही पता कर लें कि सबसे नज़दीकी सिग्नल वाली जगह कहाँ है, जो अक्सर कोई धार या गाँव होता है।

राज्य और ज़िले की मदद। राज्य और ज़िले भी आपदा नियंत्रण कक्ष और हेल्पलाइन चलाते हैं, और इनके नंबर जगह-जगह अलग होते हैं। ट्रेक से पहले, जिस राज्य और ज़िले में जा रहे हैं, उसकी आधिकारिक वेबसाइट से ये नंबर सेव कर लें:

  • राज्य या ज़िले का आपदा नियंत्रण कक्ष
  • स्थानीय पुलिस थाना
  • वन रेंज कार्यालय या वन हेल्पलाइन (उदाहरण के लिए, कर्नाटक की हेल्पलाइन 1926 है)
  • आपके आयोजक का आपातकालीन संपर्क

सबसे ज़रूरी नंबर काग़ज़ पर भी लिख लें, ताकि फ़ोन बंद हो जाए तो भी काम आएँ।

स्रोत

  1. National Disaster Management Authority (NDMA): Landslide Do's and Don'ts
  2. National Disaster Management Authority (NDMA): Floods Do's and Don'ts
  3. Emergency Response Support System (ERSS) 112: Frequently Asked Questions
  4. Press Information Bureau (Ministry of Home Affairs): Pan-India Emergency Number 112 launched (19 February 2019)
  5. India Meteorological Department (IMD): weather forecasts, warnings and Mountain Weather Bulletin
  6. Leave No Trace Center for Outdoor Ethics: Principle 6, Respect Wildlife
  7. Great Himalayan National Park: Fees, Rules and Guidelines
  8. Karnataka Forest Department: Aranya Vihaara (forest helpline 1926)
  9. Ministry of Home Affairs: Frequently Asked Questions on Protected Area Permit (PAP) / Restricted Area Permit (RAP) regime