लमखागा पास ट्रेक
किन्नौर (हिमाचल प्रदेश) और उत्तरकाशी (उत्तराखंड), उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश
इस फ़ोन पर बिना नेटवर्क के खुलेगा, नक्शे की फ़ाइल और सूची के साथ। ऑफ़लाइन सहेजे गए →
- सबसे ऊँचा बिंदु
- 5,282 मी
- दिन
- 9 दिन
- दूरी
- 85 किमी
- कठिनाई
- कठिन
सीमा क्षेत्र में 5,282 मी का दूर-दराज़ दर्रा, सिर्फ़ अनुभवी ट्रेकर्स के लिए: 4,000 मी से ऊपर मोरेन और बर्फ़ीली ढलानों पर 9-16 किमी के लंबे दिन, दर्रा पार करने वाले 8-9 घंटे के दिन ग्लेशियर पार करना जहाँ रस्सियों की ज़रूरत पड़ सकती है, छह दिन तक कोई गाँव नहीं और कोई मोबाइल नेटवर्क नहीं।
तस्वीरें
रास्ते की झलक
रास्ता
दिन-ब-दिन
दिन 1
शिमला → चितकुल (गाड़ी से)
2,200 मी → 3,435 मी
दिन 2
चितकुल → रानी कंडा
3,435 मी → 3,680 मी
दिन 3
रानी कंडा → दुमती
3,680 मी → 4,035 मी
दिन 4
दुमती → गुंदर
4,035 मी → 4,415 मी
दिन 5
गुंदर → लमखागा बेस कैंप (किन्नौर की ओर)
4,415 मी → 4,800 मी
दिन 6 · सबसे ऊँचा बिंदु
लमखागा बेस कैंप (किन्नौर की ओर) → लमखागा बेस कैंप (हर्षिल की ओर), लमखागा दर्रे से होकर
4,800 मी → 5,282 मी → 4,420 मी
दिन 7
लमखागा बेस कैंप (हर्षिल की ओर) → क्यारकोटी
4,420 मी → 3,840 मी
दिन 8
क्यारकोटी → हर्षिल
3,840 मी → 2,620 मी
दिन 9
हर्षिल → देहरादून (गाड़ी से)
2,620 मी → 640 मी
चढ़ाई और उतराई
ऊँचाई का ग्राफ़
कहाँ है
नक्शा
सिर्फ़ शुरुआत और सबसे ऊँची जगह के निशान — पूरा रास्ता नहीं। इसे किसी अच्छे नक़्शे के साथ ही इस्तेमाल करें।
मौसम
रास्ते पर अगले 5 दिन का मौसम
ट्रेक शुरू होने की जगह और सबसे ऊँची जगह का ताज़ा पूर्वानुमान। पहाड़ में मौसम जल्दी बदलता है — निकलने वाले दिन सुबह फिर से देखें।
शुरुआत · चितकुल
3,435 मी परपूर्वानुमान आ रहा है…
सबसे ऊँची जगह · लमखागा दर्रा
5,282 मी परपूर्वानुमान आ रहा है…
हर दिन: अधिकतम / न्यूनतम °C · बारिश मिमी और संभावना · बर्फ़ सेमी · हवा किमी/घंटा
मौसम का डेटा: ओपन-मीटियोयह कंप्यूटर मॉडल का अनुमान है, सरकारी चेतावनी नहीं। चेतावनी के लिए मौसम विभाग (IMD) और स्थानीय प्रशासन की सूचना मानें।
यात्रा की तैयारी
कैसे पहुँचें
- ट्रेलहेड
- चितकुल (नज़दीकी क़स्बा: सांगला)
- नज़दीकी रेलवे स्टेशन
- शिमला या कालका (शुरुआत); देहरादून (अंत)
- नज़दीकी हवाई अड्डा
- चंडीगढ़ अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (शुरुआत); जॉली ग्रांट हवाई अड्डा, देहरादून (अंत)
- सड़क से
- शिमला से चितकुल (लगभग 250 किमी, नारकंडा, रामपुर, करछम और सांगला होते हुए 8-9 घंटे); देहरादून से हर्षिल (लगभग 230 किमी, उत्तरकाशी होते हुए 8-9 घंटे), अगर हर्षिल की ओर से शुरू कर रहे हैं
- गाड़ी से
- शिमला से लगभग 8 घंटे
यात्रा की तैयारी
परमिट और शुल्क
हम किसी सरकारी स्रोत से मौजूदा परमिट नियम और शुल्क पक्का नहीं कर पाए। जाने से पहले स्थानीय वन विभाग या पर्यटन कार्यालय से पूछ लें।
यात्रा की तैयारी
ख़र्च
ख़ुद से
₹25,000–40,000
ऑपरेटर के साथ
₹30,000–55,000
प्रति व्यक्ति, शिमला/चितकुल से (या उल्टी दिशा में करने पर हर्षिल से)। 2026 के लिए छपी गाइडेड क़ीमतें: राचो ट्रेकर्स ₹30,000 से (चितकुल से हर्षिल; क़ीमत ग्रुप के आकार और पिकअप के हिसाब से बदलती है); बिकट एडवेंचर्स ₹52,000 + 5% जीएसटी, हर्षिल से, देहरादून और शिमला का आना-जाना शामिल नहीं। ख़ुद से जाने का ख़र्च एक अनुमान है: छोटे ग्रुप के लिए 7 ट्रेकिंग दिनों तक स्थानीय गाइड, रसोइया और पोर्टर या खच्चर, साथ में टेंट, खाना, परमिट और दोनों लंबे सड़क सफ़र; इस रास्ते पर स्थानीय मदद के बिना जाना ठीक नहीं है।
सामान
इस ट्रेक के लिए सबसे ज़रूरी सामान
इस रास्ते पर सबसे ज़्यादा काम आने वाला सामान, इसकी ऊँचाई, मौसम और ख़तरों के हिसाब से चुना गया।
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विज्ञापन · एफ़िलिएट लिंकबालाक्लावा (चेहरा ढकने वाली ऊनी टोपी)
ज़रूरी4,500 मी से ऊपर: गर्मी में भी तेज़ हवा और ठंड
दुकान वाले बटन उस दुकान पर खोज खोलते हैं, हमारा चुना हुआ कोई सामान नहीं। अमेज़न एसोसिएट के रूप में हम योग्य ख़रीदारियों से कमाई करते हैं। फ़ोटो सिर्फ़ सामान का प्रकार दिखाती हैं, कोई ख़ास प्रोडक्ट नहीं। एफ़िलिएट जानकारी
सामान की सूची
इस ट्रेक के हिसाब से: ऊँचाई, मौसम, दिन और रास्ते के ख़तरे।
35 में से 0 रख लिए
मई में रास्ते पर बर्फ़: माइक्रोस्पाइक्स, गेटर और गर्म कपड़े ज़रूर रखें।
बैग में रखते ही हर चीज़ पर निशान लगाएँ।
जाने से पहले जानें
काम की बातें
- मोबाइल नेटवर्क
- चितकुल छोड़ने के बाद हर्षिल पहुँचने तक कोई मोबाइल नेटवर्क नहीं; रास्ते में बाहर से संपर्क का ज़रिया सिर्फ़ ITBP और सेना की चौकियाँ हैं (जैसे दुमती में)।
- आख़िरी एटीएम
- सांगला, चितकुल जाने वाली सड़क पर
- नज़दीकी अस्पताल
- सांगला में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और रिकांग पिओ में ज़िला अस्पताल (किन्नौर की ओर); हर्षिल की ओर उत्तरकाशी ज़िला अस्पताल
- पानी
- किन्नौर की ओर बास्पा नदी और उसके सहायक नाले, दर्रे के पास ग्लेशियर का पिघला पानी, और हर्षिल की ओर जलंधरी गाड और क्यारकोटी झील। सारा पानी साफ़ करके पिएँ।
ख़ास बातें
- तिब्बत सीमा के पास उत्तराखंड-हिमाचल जल-विभाजक पर 5,282 मी का दर्रा पार करना
- पुरानी हिंदुस्तान-तिब्बत रोड पर भारत के आख़िरी गाँव चितकुल से बास्पा घाटी में ऊपर की ओर पैदल चलना
- जलंधरी गाड घाटी के ग्लेशियरों के नीचे क्यारकोटी झील के किनारे कैंप
- ITBP चौकियों के बीच, गढ़वाल और किन्नौर के सबसे कम देखे गए इलाक़ों में से एक में बिना किसी गाँव के छह दिन
जोखिम
- ट्रेकिंग प्रतिबंध: अक्टूबर 2021 के आख़िर में किन्नौर के उपायुक्त ने आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 34 के तहत किन्नौर ज़िले के सभी ट्रेक पर ट्रेकिंग और पर्वतारोहण पर 'अगले आदेश तक' प्रतिबंध लगा दिया और उल्लंघन करने वालों पर क़ानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी (हिमाचल वॉचर, 26 अक्टूबर 2021); फिर 7 सितंबर 2022 को किन्नौर प्रशासन ने उत्तरकाशी और किन्नौर को जोड़ने वाले ट्रेक पर भी तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी (अमर उजाला)। यह इन रास्तों पर हुई मौतों के बाद किया गया। हमें इनमें से किसी भी प्रतिबंध को हटाने का कोई आदेश नहीं मिला, हालाँकि ऑपरेटर 2026 के ट्रेक की तारीख़ें दिखा रहे हैं। यह ट्रेक किन्नौर और उत्तरकाशी को जोड़ता है: जब तक प्रतिबंध लागू है, यह ट्रेक न करें, और बुकिंग से पहले रिकांग पिओ में किन्नौर ज़िला प्रशासन और उत्तरकाशी ज़िला कार्यालय से पक्की जानकारी लें।
- मौसम बहुत तेज़ी से बिगड़ता है: अक्टूबर 2021 में दर्रे पर आए तूफ़ान में कम से कम 12 ट्रेकर्स की मौत हुई, कुछ की हिमस्खलन में। मौसम का पूर्वानुमान देखते रहें और एक दिन अतिरिक्त रखें।
- दर्रे के पास ग्लेशियर और बर्फ़ीली ढलानों पर दरारें (क्रेवास) और बर्फ़ की परत हो सकती है; रस्सियाँ, क्रैम्पॉन और रास्ता जानने वाला गाइड ज़रूरी है।
- हिमाचल प्रदेश ने 15,000 फ़ुट से ऊँचे ट्रेक सिर्फ़ 1 मई से 15 सितंबर तक करने की सलाह दी है और ज़िलों से उस तारीख़ के बाद ऐसे दर्रों पर रोक लगाने को कहा है, इसलिए अक्टूबर में दर्रा पार करने की अनुमति न मिले, ऐसा हो सकता है।
- लगभग 3,400 मी से 5,282 मी तक तेज़ी से ऊँचाई बढ़ती है; अनुकूलन के लिए एक दिन रखें और ऊँचाई की बीमारी (AMS) के पहले लक्षण दिखते ही वापस लौट आएँ।
जाने से पहले जानें
सवाल-जवाब
क्या अभी लमखागा पास ट्रेक करने की अनुमति है?
जहाँ तक हमें पता चला है, नहीं। अक्टूबर 2021 के आख़िर में किन्नौर के उपायुक्त ने आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 34 के तहत किन्नौर ज़िले के सभी ट्रेक पर ट्रेकिंग और पर्वतारोहण पर 'अगले आदेश तक' प्रतिबंध लगा दिया और उल्लंघन करने वालों पर क़ानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी (हिमाचल वॉचर, 26 अक्टूबर 2021); फिर 7 सितंबर 2022 को किन्नौर प्रशासन ने उत्तरकाशी और किन्नौर को जोड़ने वाले ट्रेक पर भी तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी (अमर उजाला)। हमें इनमें से किसी भी प्रतिबंध को हटाने का कोई आदेश नहीं मिला। जब तक प्रतिबंध लागू है, यह ट्रेक न करें; बुकिंग से पहले रिकांग पिओ में किन्नौर ज़िला प्रशासन से पता कर लें। उत्तरकाशी प्रशासन ने 2022 में कहा था कि उसकी तरफ़ से अपना कोई प्रतिबंध नहीं है, लेकिन वह ट्रेकर्स को तभी जाने देगा जब किन्नौर अनुमति दे।
लमखागा दर्रा कितना ऊँचा है और ट्रेक कितना लंबा है?
दर्रा लगभग 5,282 मी (17,320 फ़ुट) ऊँचा है। चितकुल-हर्षिल ट्रेक पैदल लगभग 75-90 किमी का है, जिसमें 7 दिन ट्रेकिंग होती है; शिमला से और देहरादून तक गाड़ी के दिन जोड़कर ज़्यादातर ऑपरेटर इसे 9-10 दिन में कराते हैं।
क्या लमखागा पास के लिए परमिट चाहिए?
हाँ। यह रास्ता तिब्बत सीमा के पास से गुज़रता है और ITBP और सेना की चौकियों से होकर जाता है, इसलिए किन्नौर ज़िला प्रशासन से इनर लाइन परमिट (ILP) और वन विभाग की अनुमति दोनों चाहिए। ऑपरेटर इनका इंतज़ाम करते हैं; ख़ुद से जाने वाले ट्रेकर्स किन्नौर और उत्तरकाशी के ज़िला कार्यालयों से मौजूदा नियम पता कर लें।
लमखागा पास जाने का सबसे अच्छा समय कौन-सा है?
मई के आख़िर से जून तक, और सितंबर। सर्दियों में दर्रा बर्फ़ से ढका रहता है, ऊपरी बास्पा और क्यारकोटी घाटियों में मई की शुरुआत तक गहरी बर्फ़ रहती है, और जुलाई-अगस्त के मानसून में रास्ता ख़तरनाक हो जाता है। कुछ ऑपरेटर अक्टूबर की शुरुआत में भी ट्रेक कराते हैं, लेकिन हिमाचल ऊँचाई वाले ट्रेक सिर्फ़ 15 सितंबर तक करने की सलाह देता है।
क्या लमखागा पास शुरुआती ट्रेकर्स के लिए ठीक है?
नहीं। ऑपरेटर इसे कठिन बताते हैं और पहले ऊँचाई वाले ट्रेक का अनुभव माँगते हैं, अच्छा हो कि ग्लेशियर या बर्फ़ का अनुभव भी हो। दर्रा पार करने का दिन 8-9 घंटे का है, जिसमें ग्लेशियर और 5,000 मी से ऊँचा दर्रा पार करना होता है।
चितकुल से शुरू करें या हर्षिल से?
दोनों तरफ़ से हो सकता है। ज़्यादातर ग्रुप चितकुल से शुरू करते हैं, जिससे बास्पा घाटी में ऊपर चढ़ते हुए धीरे-धीरे अनुकूलन हो जाता है; हर्षिल से शुरू करने पर लगभग 2,600 मी से दर्रे तक कम दिनों में ज़्यादा खड़ी चढ़ाई करनी पड़ती है।
आपात स्थिति में
नेटवर्क जाने से पहले ये नंबर सेव कर लें। कॉल करने के लिए दबाएँ।
- 112हर आपात स्थितिभारत का एक ही आपातकालीन नंबर — हर राज्य में चलता है
- 108एंबुलेंस
- 1077ज़िला आपदा नियंत्रण कक्ष
आप यहाँ हैं
ज़िला: किन्नौर (हिमाचल प्रदेश) और उत्तरकाशी (उत्तराखंड)उत्तराखंड · हिमाचल प्रदेश
- सबसे नज़दीकी अस्पताल
- सांगला में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और रिकांग पिओ में ज़िला अस्पताल (किन्नौर की ओर); हर्षिल की ओर उत्तरकाशी ज़िला अस्पताल
- आख़िरी एटीएम
- सांगला, चितकुल जाने वाली सड़क पर
- फ़ोन नेटवर्क
- चितकुल छोड़ने के बाद हर्षिल पहुँचने तक कोई मोबाइल नेटवर्क नहीं; रास्ते में बाहर से संपर्क का ज़रिया सिर्फ़ ITBP और सेना की चौकियाँ हैं (जैसे दुमती में)।
निकलने से पहले
- किसी को अपना रास्ता और लौटने का समय बताकर जाएँ।
- फ़ोन पूरा चार्ज रखें और पावर बैंक साथ लें।
- रास्ते का ऑफ़लाइन नक्शा डाउनलोड कर लें।
- मौसम बिगड़े तो लौट आएँ — पहाड़ कहीं नहीं जाएगा।
लमखागा पास के बारे में सवाल
अभी कोई सवाल नहीं है। कुछ पूछें, जो लोग यह ट्रेक कर चुके हैं वे जवाब दे सकते हैं।
अपनी ट्रेक की तस्वीर #TreksAndTrails के साथ डालें
मैंने यह ट्रेक किया है
क्या लमखागा पास इस पेज से अलग दिखा? बताइए क्या बदला है, हम जाँच करेंगे।
जानकारी कहाँ से ली गई
स्रोत
आख़िरी जाँच:
- Lamkhaga Pass Trek — Bikat Adventures
- Lamkhaga Pass Trek- A high altitude pass between Uttarakhand & Himachal — Himalaya Shelter
- Lamkhaga Pass 2026 - Chitkul To Gangotri Trek — Raacho Trekkers
- Lamkhaga Pass — Wikipedia
- Kinnaur administration bans trekking on Uttarkashi-Kinnaur route (7 Sep 2022) — Amar Ujala
- Himachal government restricts trekking in high-altitude tracks from September 15 — The Tribune
- Trekking in Kinnaur banned after two tragedies — Himachal Watcher
फ़ोटो: Sukanya Ray, CC BY-SA 4.0; Shivendujha, CC BY-SA 4.0; Harshit SR, CC BY-SA 4.0




