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कालिंदी खाल ट्रेक

उत्तरकाशी और चमोली, उत्तराखंड

बहुत कठिन15 दिनसबसे अच्छा: मई–जून, सित–अक्टूबर्फ़ीला ट्रेक

सूर्योदय के समय कालिंदी खाल पर बर्फ़ में गड़ी दो आइस एक्स, क्षितिज पर पूर्व की ओर बर्फ़ीली चोटियाँ5,947 मीसबसे ऊँचा बिंदु3 तस्वीरें
सबसे ऊँचा बिंदु
5,947 मी
दिन
15 दिन
दूरी
99 किमी
कठिनाई
बहुत कठिन

सबसे अच्छे महीने मई–जून, सित–अक्टू

  1. जनबंद
  2. फ़रबंद
  3. मार्चबंद
  4. अप्रै
  5. मईसबसे अच्छा, बर्फ़
  6. जूनसबसे अच्छा, बर्फ़
  7. जुला
  8. अग
  9. सितसबसे अच्छा
  10. अक्टूसबसे अच्छा, बर्फ़
  11. नव
  12. दिसबंद

5,947 मी ऊँचा ग्लेशियर वाला दर्रा, जिसे 5,000 मी से ऊपर कई रातें बिताने के बाद पार किया जाता है: मोरेन और चतुरंगी व श्वेत ग्लेशियर पर कई दिन, छिपी हुई दरारें, रस्सी बाँधकर चलने वाले हिस्से, और दर्रे वाला दिन 13 किमी और 8-10 घंटे का। ऑपरेटर पहले के ऊँचाई वाले ट्रेक का अनुभव माँगते हैं; यह शुरुआती लोगों के लिए नहीं है।

तस्वीरें

रास्ते की झलक

सूर्योदय के समय कालिंदी खाल पर बर्फ़ में गड़ी दो आइस एक्स, क्षितिज पर पूर्व की ओर बर्फ़ीली चोटियाँ
सूर्योदय के समय कालिंदी खाल पर बर्फ़ में गड़ी दो आइस एक्स, क्षितिज पर पूर्व की ओर बर्फ़ीली चोटियाँफ़ोटो: Danielvandermaas · CC BY-SA 4.0

1 / 3

रास्ता

दिन-ब-दिन

  1. दिन 1

    देहरादून → उत्तरकाशी

    सड़क से · 6 घंटे · होटल

    640 मी → 1,160 मी

  2. दिन 2

    उत्तरकाशी → गंगोत्री

    सड़क से · 4 घंटे · होटल

    1,160 मी → 3,048 मी

  3. दिन 3

    गंगोत्री → गंगोत्री (अनुकूलन के लिए पैदल सैर)

    सड़क से · 2 घंटे · होटल

    3,048 मी → 3,048 मी

  4. दिन 4

    गंगोत्री → भोजवासा

    14 किमी · 6.5 घंटे · कैंप

    3,048 मी → 3,800 मी

  5. दिन 5

    भोजवासा → तपोवन (गौमुख होते हुए)

    13 किमी · 6.5 घंटे · कैंप

    3,800 मी → 4,460 मी

  6. दिन 6

    तपोवन → नंदनवन (गंगोत्री ग्लेशियर पार करके)

    8 किमी · 6 घंटे · कैंप

    4,460 मी → 4,350 मी

  7. दिन 7

    नंदनवन → वासुकी ताल

    6 किमी · 5 घंटे · कैंप

    4,350 मी → 4,880 मी

  8. दिन 8

    वासुकी ताल → वासुकी ताल (आराम और अनुकूलन)

    सड़क से · 0 घंटे · कैंप

    4,880 मी → 4,880 मी

  9. दिन 9

    वासुकी ताल → खड़ा पत्थर

    6 किमी · 6 घंटे · कैंप

    4,880 मी → 5,200 मी

  10. दिन 10

    खड़ा पत्थर → श्वेत ग्लेशियर कैंप

    8 किमी · 5.5 घंटे · कैंप

    5,200 मी → 5,450 मी

  11. दिन 11

    श्वेत ग्लेशियर कैंप → कालिंदी बेस कैंप

    6 किमी · 4.5 घंटे · कैंप

    5,450 मी → 5,660 मी

  12. दिन 12 · सबसे ऊँचा बिंदु

    कालिंदी बेस कैंप → राजपरव (कालिंदी खाल होते हुए)

    13 किमी · 9 घंटे · कैंप

    5,660 मी → 5,947 मी → 4,900 मी

  13. दिन 13

    राजपरव → अरवा ताल

    13 किमी · 6.5 घंटे · कैंप

    4,900 मी → 4,500 मी

  14. दिन 14

    अरवा ताल → श्री बद्रीनाथ धाम (घस्तोली और माणा होते हुए)

    12 किमी · 6 घंटे · होटल

    4,500 मी → 3,100 मी

  15. दिन 15

    श्री बद्रीनाथ धाम → देहरादून

    सड़क से · 10 घंटे · रात नहीं रुकना

    3,100 मी → 640 मी

चढ़ाई और उतराई

ऊँचाई का ग्राफ़

2,5003,5004,5005,5006,500गंगोत्री: 3,048 मी, 0 किमीभोजवासा: 3,800 मी, 14 किमीतपोवन (गौमुख होते हुए): 4,460 मी, 27 किमीनंदनवन (गंगोत्री ग्लेशियर पार करके): 4,350 मी, 35 किमीवासुकी ताल: 4,880 मी, 41 किमीवासुकी ताल (आराम और अनुकूलन): 4,880 मी, 41 किमीखड़ा पत्थर: 5,200 मी, 47 किमीश्वेत ग्लेशियर कैंप: 5,450 मी, 55 किमीकालिंदी बेस कैंप: 5,660 मी, 61 किमीदिन 12 का सबसे ऊँचा बिंदु: 5,947 मी, 67.5 किमीराजपरव (कालिंदी खाल होते हुए): 4,900 मी, 74 किमीअरवा ताल: 4,500 मी, 87 किमीश्री बद्रीनाथ धाम (घस्तोली और माणा होते हुए): 3,100 मी, 99 किमी
समुद्र तल से ऊँचाई (मीटर) · दूरी 99 किमी

कहाँ है

नक्शा

GPX वेपॉइंट डाउनलोड करें

सिर्फ़ शुरुआत और सबसे ऊँची जगह के निशान — पूरा रास्ता नहीं। इसे किसी अच्छे नक़्शे के साथ ही इस्तेमाल करें।

मौसम

रास्ते पर अगले 5 दिन का मौसम

ट्रेक शुरू होने की जगह और सबसे ऊँची जगह का ताज़ा पूर्वानुमान। पहाड़ में मौसम जल्दी बदलता है — निकलने वाले दिन सुबह फिर से देखें।

हर दिन: अधिकतम / न्यूनतम °C · बारिश मिमी और संभावना · बर्फ़ सेमी · हवा किमी/घंटा

मौसम का डेटा: ओपन-मीटियोयह कंप्यूटर मॉडल का अनुमान है, सरकारी चेतावनी नहीं। चेतावनी के लिए मौसम विभाग (IMD) और स्थानीय प्रशासन की सूचना मानें।

यात्रा की तैयारी

कैसे पहुँचें

ट्रेलहेड
गंगोत्री
नज़दीकी रेलवे स्टेशन
देहरादून (ऋषिकेश से भी जा सकते हैं)
नज़दीकी हवाई अड्डा
जॉली ग्रांट हवाई अड्डा, देहरादून
सड़क से
देहरादून से गंगोत्री, उत्तरकाशी और हर्षिल होते हुए लगभग 241 किमी (शुरुआत); बद्रीनाथ से देहरादून, जोशीमठ और रुद्रप्रयाग होते हुए लगभग 295-330 किमी (वापसी)
गाड़ी से
देहरादून से लगभग 10 घंटे

यात्रा की तैयारी

परमिट और शुल्क

हम किसी सरकारी स्रोत से मौजूदा परमिट नियम और शुल्क पक्का नहीं कर पाए। जाने से पहले स्थानीय वन विभाग या पर्यटन कार्यालय से पूछ लें।

यात्रा की तैयारी

ख़र्च

ख़ुद से

₹60,000–1,00,000

ऑपरेटर के साथ

₹1,04,500–2,10,000

प्रति व्यक्ति। 2026-27 के लिए छपी गाइडेड क़ीमतें: ग्रेट एडवेंचर ₹1,04,499 उत्तरकाशी से; बिकट एडवेंचर्स ₹1,40,000 + 5% जीएसटी गंगोत्री से (देहरादून-गंगोत्री और बद्रीनाथ-देहरादून की गाड़ी अलग से, ₹9,000-16,000 प्रति गाड़ी); एक्वाटेरा ₹1,40,000 + 5% जीएसटी; व्हाइट मैजिक ₹2,10,000 देहरादून से। ख़ुद से जाने का ख़र्च देहरादून से एक मोटा अनुमान है: यह दर्रा स्थानीय गाइड और पोर्टरों के बिना पार नहीं किया जाता, इसलिए इसमें गंगोत्री में गाइड, रसोइया और पोर्टर रखना, ग्लेशियर का सामान (रस्सी, हार्नेस, क्रैम्पॉन), 10 दिन का राशन, उद्यान शुल्क और दोनों छोर की लंबी सड़क यात्रा शामिल मानी गई है।

सामान

इस ट्रेक के लिए सबसे ज़रूरी सामान

इस रास्ते पर सबसे ज़्यादा काम आने वाला सामान, इसकी ऊँचाई, मौसम और ख़तरों के हिसाब से चुना गया।

सामान की पूरी सूची देखें

दुकान वाले बटन उस दुकान पर खोज खोलते हैं, हमारा चुना हुआ कोई सामान नहीं। अमेज़न एसोसिएट के रूप में हम योग्य ख़रीदारियों से कमाई करते हैं। फ़ोटो सिर्फ़ सामान का प्रकार दिखाती हैं, कोई ख़ास प्रोडक्ट नहीं। एफ़िलिएट जानकारी

सामान की सूची

इस ट्रेक के हिसाब से: ऊँचाई, मौसम, दिन और रास्ते के ख़तरे।

34 में से 0 रख लिए

मई–जून, अक्टू में रास्ते पर बर्फ़: माइक्रोस्पाइक्स, गेटर और गर्म कपड़े ज़रूर रखें।

बैग में रखते ही हर चीज़ पर निशान लगाएँ।

क्या पहनें
बैग और सामान
सोने का सामान

कई ट्रेक आयोजक टेंट और स्लीपिंग बैग देते हैं। ख़रीदने से पहले पूछ लें।

सुरक्षा
पानी और खाना
काग़ज़ात और पैसे

आपके निशान सिर्फ़ इसी फ़ोन या कंप्यूटर पर सहेजे जाते हैं।

ख़रीदें वाले बटन उस दुकान पर खोज खोलते हैं, हमारा चुना हुआ कोई सामान नहीं। कुछ एफ़िलिएट लिंक हैं: इनसे हमें थोड़ा कमीशन मिल सकता है, आपको कोई अतिरिक्त ख़र्च नहीं। अमेज़न एसोसिएट के रूप में हम योग्य ख़रीदारियों से कमाई करते हैं। फ़ोटो सिर्फ़ सामान का प्रकार दिखाती हैं, कोई ख़ास प्रोडक्ट नहीं। एफ़िलिएट जानकारी

जाने से पहले जानें

काम की बातें

मोबाइल नेटवर्क
गंगोत्री के बाद मोबाइल सिग्नल बहुत कम या बिल्कुल नहीं; ग्लेशियरों पर और दर्रे पर कोई सिग्नल नहीं। माणा और बद्रीनाथ के पास सिग्नल लौट आता है।
आख़िरी एटीएम
उत्तरकाशी, गंगोत्री से लगभग 97 किमी पहले; नक़द देहरादून या उत्तरकाशी में ही निकाल लें।
नज़दीकी अस्पताल
गंगोत्री की तरफ़ ज़िला अस्पताल उत्तरकाशी, बद्रीनाथ की तरफ़ जोशीमठ; गंभीर मामलों में एम्स ऋषिकेश। ग्लेशियरों से निकासी सिर्फ़ हेलीकॉप्टर से ही हो सकती है।
पानी
मोरेन के साथ-साथ, वासुकी ताल और अरवा ताल पर ग्लेशियर की धाराएँ और पिघले पानी के कुंड मिलते हैं; ऊपर के ग्लेशियर कैंपों पर अक्सर बर्फ़ पिघलाकर पानी बनाना पड़ता है। ग्लेशियर के पानी में गाद होती है: उसे छानकर साफ़ करके पिएँ।

ख़ास बातें

  • गंगोत्री (भागीरथी) घाटी से अलकनंदा घाटी और श्री बद्रीनाथ धाम तक 5,947 मी ऊँचा ग्लेशियर वाला दर्रा पार करना
  • गौमुख, जहाँ गंगोत्री ग्लेशियर का मुहाना और भागीरथी का उद्गम है, और शिवलिंग चोटी के नीचे तपोवन का बुग्याल
  • चतुरंगी ग्लेशियर के साथ-साथ शिवलिंग, मेरु, भागीरथी चोटियों, चंद्र पर्वत और सतोपंथ के पास से नज़ारे
  • लगभग 4,880 मी की ऊँचाई पर ग्लेशियर की झील वासुकी ताल पर कैंपिंग
  • अरवा ताल, घस्तोली और तिब्बत से पहले के आख़िरी गाँव माणा से होकर ट्रेक का समापन

जोखिम

  • अचानक बर्फ़ीले तूफ़ान: सितंबर 2026 के आख़िर में भारी बर्फ़बारी से 19 ट्रेकर कालिंदी बेस कैंप के पास फँस गए और SDRF को दो दिनों में उन्हें हवाई मार्ग से हर्षिल पहुँचाना पड़ा। कुछ अतिरिक्त दिन लेकर चलें और मौसम बिगड़ते ही जल्दी लौट आएँ।
  • चतुरंगी और श्वेत ग्लेशियर पर दरारें, हिमस्खलन वाली ढलानें और ढीला मोरेन; रस्सी, हार्नेस, क्रैम्पॉन और रास्ता जानने वाला गाइड ज़रूरी हैं। एक ट्रेकर की रिपोर्ट में असली दर्रे की जगह एक रिज पर ग़लत मुड़ जाने का ज़िक्र है, जिसमें एक दिन बर्बाद हुआ।
  • रास्ता माणा के पास सीमा क्षेत्र में ख़त्म होता है: गंगोत्री और घस्तोली में सेना/ITBP की चौकियाँ काग़ज़ जाँचती हैं, और भारतीय टीम के बिना आए ट्रेकरों को रोककर जोशीमठ ले जाया गया है। एक ऑपरेटर (हिमालयन ड्रीम ट्रेक्स) के अनुसार इनर लाइन परमिट ज़रूरी है; हम किसी सरकारी स्रोत से इसकी पुष्टि नहीं कर पाए, इसलिए उत्तरकाशी और चमोली के ज़िला कार्यालयों से मौजूदा नियम पता कर लें।
  • हिमालय शेल्टर जुलाई-अगस्त में न जाने की सलाह देता है (मानसून की बारिश, उफनती धाराएँ, सड़कों पर भूस्खलन); अक्टूबर के आख़िर में दर्रे पर बर्फ़बारी की संभावना ज़्यादा रहती है।
  • 5,000 मी से ऊपर लंबे हिस्से: अनुकूलन के दिन ज़रूर रखें और ऊँचाई की बीमारी (AMS) के पहले लक्षण दिखते ही नीचे उतर आएँ।

जाने से पहले जानें

सवाल-जवाब

क्या शुरुआती लोग कालिंदी खाल ट्रेक कर सकते हैं?

नहीं। ऑपरेटर इसे कठिन या तकनीकी ट्रेक मानते हैं और पहले के ऊँचाई वाले ट्रेक का अनुभव माँगते हैं। इसमें कई ग्लेशियर पार करने पड़ते हैं, रातें 5,000 मी से ऊपर बीतती हैं, और दर्रे वाला दिन लगभग 13 किमी और 8-10 घंटे का होता है।

कालिंदी खाल जाने का सबसे अच्छा समय कब है?

मई-जून, और सितंबर से अक्टूबर की शुरुआत तक। गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान 30 नवंबर से 31 मार्च तक बंद रहता है, जुलाई-अगस्त में मानसून की बारिश होती है, और अक्टूबर के आख़िर में दर्रे पर अक्सर बर्फ़ गिरती है।

कालिंदी खाल के लिए कौन से परमिट चाहिए?

गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान का प्रवेश परमिट, जो पथिक पोर्टल पर ऑनलाइन या उत्तरकाशी के वन कार्यालय से मिलता है। एक ऑपरेटर के अनुसार इनर लाइन परमिट भी चाहिए, क्योंकि रास्ता माणा के पास सीमा क्षेत्र में ख़त्म होता है (हम सरकारी तौर पर इसकी पुष्टि नहीं कर पाए)। गंगोत्री और घस्तोली में सेना/ITBP की चौकियाँ काग़ज़ जाँचती हैं। हम मौजूदा सरकारी शुल्क पक्का नहीं कर पाए, इसलिए वन कार्यालय या अपने ऑपरेटर से पता कर लें।

कालिंदी खाल ट्रेक कितना लंबा है?

गंगोत्री से बद्रीनाथ तक लगभग 97-100 किमी पैदल, आम तौर पर 14-15 दिन में, जिसमें देहरादून से गाड़ी का सफ़र, अनुकूलन के दिन और वापसी का सफ़र शामिल है।

क्या रास्ते में मोबाइल नेटवर्क या एटीएम मिलता है?

गंगोत्री के बाद सिग्नल बहुत कम या बिल्कुल नहीं है। सबसे पास का एटीएम उत्तरकाशी में है, गंगोत्री से लगभग 97 किमी पहले, इसलिए देहरादून या उत्तरकाशी से नक़द लेकर चलें।

इस ट्रेक के लिए आपकी 8 हफ़्ते की योजनाबहुत कठिन ग्रेड। यात्रा से लगभग 12 हफ़्ते पहले शुरू करें।
SOS

आपात स्थिति में

नेटवर्क जाने से पहले ये नंबर सेव कर लें। कॉल करने के लिए दबाएँ।

आप यहाँ हैं

ज़िला: उत्तरकाशी और चमोलीउत्तराखंड

सबसे नज़दीकी अस्पताल
गंगोत्री की तरफ़ ज़िला अस्पताल उत्तरकाशी, बद्रीनाथ की तरफ़ जोशीमठ; गंभीर मामलों में एम्स ऋषिकेश। ग्लेशियरों से निकासी सिर्फ़ हेलीकॉप्टर से ही हो सकती है।
आख़िरी एटीएम
उत्तरकाशी, गंगोत्री से लगभग 97 किमी पहले; नक़द देहरादून या उत्तरकाशी में ही निकाल लें।
फ़ोन नेटवर्क
गंगोत्री के बाद मोबाइल सिग्नल बहुत कम या बिल्कुल नहीं; ग्लेशियरों पर और दर्रे पर कोई सिग्नल नहीं। माणा और बद्रीनाथ के पास सिग्नल लौट आता है।

निकलने से पहले

  1. किसी को अपना रास्ता और लौटने का समय बताकर जाएँ।
  2. फ़ोन पूरा चार्ज रखें और पावर बैंक साथ लें।
  3. रास्ते का ऑफ़लाइन नक्शा डाउनलोड कर लें।
  4. मौसम बिगड़े तो लौट आएँ — पहाड़ कहीं नहीं जाएगा।
समुदाय · जल्द खुल रहा है

कालिंदी खाल के बारे में सवाल

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समुदाय · जल्द खुल रहा है

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जानकारी कहाँ से ली गई

स्रोत

आख़िरी जाँच:

  1. Kalindi Khal Expedition (Gangotri to Badrinath) — Bikat Adventures
  2. Kalindi Khal Trek — Himalayan Dream Treks
  3. Kalindi Khal Pass Trek — Himalaya Shelter
  4. Kalindi Khal Trekking Expedition — Himalayan High
  5. Kalindi Khal pass (5,950 M) — Great Adventure
  6. Kalindi Khal Trek — White Magic Adventure Travel
  7. Kalindi Pass Trek — Aquaterra Adventures
  8. Garwhal himal: Kalindi khal (trip report, August 2016) — Last Frontiers on Foot
  9. Gangotri National Park Reopens For Trek: Date, Permits, And What Travellers Need To Know (updated 4 Apr 2026) — Outlook Traveller
  10. Uttarkashi: All 19 trekkers stranded on Kalindi Khal trek rescued (29 Sep 2026) — NewKerala (IANS)

फ़ोटो: Danielvandermaas, CC BY-SA 4.0; Asish Das75, CC BY-SA 4.0; DipankarSen68, CC BY-SA 4.0

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चीड़ से ढकी चट्टानों के नीचे भागीरथी के किनारे बसा गंगोत्री कस्बा और मंदिर, जहाँ से ट्रेक शुरू होता है5,490 मी

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ऑडेन्स कॉल

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  1. जनवरीबंद
  2. फ़रवरीबंद
  3. मार्चबंद
  4. अप्रैल
  5. मईसबसे अच्छा
  6. जूनसबसे अच्छा
  7. जुलाई
  8. अगस्त
  9. सितंबरसबसे अच्छा
  10. अक्टूबरसबसे अच्छा
  11. नवंबर
  12. दिसंबरबंद
गहरे नीले आसमान के नीचे, बर्फ़ से ढकी थलय सागर की पिरामिड जैसी चोटी के नीचे पथरीले किनारे वाली केदारताल झील4,750 मी

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केदारताल

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  7. जुलाई
  8. अगस्त
  9. सितंबरसबसे अच्छा
  10. अक्टूबरसबसे अच्छा
  11. नवंबर
  12. दिसंबरबंद
चतुरंगी ग्लेशियर के धूसर मोरेन और बर्फ़ के नीचे, उथली वासुकी ताल झील के किनारे ट्रेकर्स के टेंट4,880 मी

उत्तराखंड

वासुकी ताल

बहुत कठिन9 दिनमई–जून, सित–अक्टू

  1. जनवरीबंद
  2. फ़रवरीबंद
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  4. अप्रैल
  5. मईसबसे अच्छा
  6. जूनसबसे अच्छा
  7. जुलाई
  8. अगस्त
  9. सितंबरसबसे अच्छा
  10. अक्टूबरसबसे अच्छा
  11. नवंबर
  12. दिसंबरबंद
गौमुख पर गंगोत्री ग्लेशियर के मुहाने की धूसर बर्फ़ीली दीवार, पत्थरों के ऊपर से तेज़ बहती भागीरथी नदी और पीछे बर्फ़ से ढकी भागीरथी चोटियाँ4,460 मी

उत्तराखंड

गौमुख तपोवन

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  7. जुलाईबंद
  8. अगस्तबंद
  9. सितंबरसबसे अच्छा
  10. अक्टूबरसबसे अच्छा
  11. नवंबर
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