ऑडेन्स कॉल ट्रेक
उत्तरकाशी, टिहरी गढ़वाल और रुद्रप्रयाग, उत्तराखंड
इस फ़ोन पर बिना नेटवर्क के खुलेगा, नक्शे की फ़ाइल और सूची के साथ। ऑफ़लाइन सहेजे गए →
5,490 मीसबसे ऊँचा बिंदु- सबसे ऊँचा बिंदु
- 5,490 मी
- दिन
- 15 दिन
- दूरी
- 85 किमी
- कठिनाई
- बहुत कठिन
यह पैदल चलने वाला आम रास्ता नहीं, बल्कि तकनीकी ग्लेशियर दर्रा है: 5,490 मी ऊँचे कॉल पर खड़ी बर्फ़ और हिम पर चढ़ाई होती है, बहुत दरारों वाले खतलिंग ग्लेशियर पर उतरने के लिए रस्सी, हार्नेस और क्रैम्पॉन चाहिए, और श्री केदारनाथ धाम से पहले रास्ता कई दिन 4,000 मी से ऊपर रहता है, जिसमें एक दूसरा दर्रा (मयाली, लगभग 5,000 मी) भी पार करना होता है। ऑपरेटर पहले के ऊँचाई वाले ट्रेक का अनुभव माँगते हैं।
रास्ता
दिन-ब-दिन
दिन 1
देहरादून → गंगोत्री
430 मी → 3,415 मी
दिन 2
गंगोत्री → गंगोत्री (अनुकूलन का दिन)
3,415 मी → 3,415 मी
दिन 3
गंगोत्री → नाला कैंप
3,415 मी → 3,760 मी
दिन 4
नाला कैंप → रुद्रगैरा बेस कैंप
3,760 मी → 4,350 मी
दिन 5
रुद्रगैरा बेस कैंप → रुद्रगैरा बेस कैंप (अनुकूलन का दिन)
4,350 मी → 4,350 मी
दिन 6
रुद्रगैरा बेस कैंप → ऑडेन्स कॉल बेस कैंप (गंगोत्री बेस कैंप होते हुए)
4,350 मी → 4,720 मी
दिन 7 · सबसे ऊँचा बिंदु
ऑडेन्स कॉल बेस कैंप → खतलिंग ग्लेशियर कैंप (ऑडेन्स कॉल होते हुए)
4,720 मी → 5,490 मी → 5,000 मी
दिन 8
खतलिंग ग्लेशियर कैंप → ज़ीरो पॉइंट
5,000 मी → 3,870 मी
दिन 9
ज़ीरो पॉइंट → ज़ीरो पॉइंट (आराम का दिन)
3,870 मी → 3,870 मी
दिन 10
ज़ीरो पॉइंट → चौकी
3,870 मी → 3,580 मी
दिन 11
चौकी → मसर ताल
3,580 मी → 3,675 मी
दिन 12
मसर ताल → वासुकी ताल (मयाली दर्रा होते हुए)
3,675 मी → 5,000 मी → 4,135 मी
दिन 13
वासुकी ताल → श्री केदारनाथ धाम
4,135 मी → 3,590 मी
दिन 14
श्री केदारनाथ धाम → गौरीकुंड
3,590 मी → 1,985 मी
दिन 15
गौरीकुंड → देहरादून
1,985 मी → 430 मी
चढ़ाई और उतराई
ऊँचाई का ग्राफ़
कहाँ है
नक्शा
सिर्फ़ शुरुआत और सबसे ऊँची जगह के निशान — पूरा रास्ता नहीं। इसे किसी अच्छे नक़्शे के साथ ही इस्तेमाल करें।
मौसम
रास्ते पर अगले 5 दिन का मौसम
ट्रेक शुरू होने की जगह और सबसे ऊँची जगह का ताज़ा पूर्वानुमान। पहाड़ में मौसम जल्दी बदलता है — निकलने वाले दिन सुबह फिर से देखें।
शुरुआत · गंगोत्री
3,415 मी परपूर्वानुमान आ रहा है…
सबसे ऊँची जगह · ऑडेन्स कॉल
5,490 मी परपूर्वानुमान आ रहा है…
हर दिन: अधिकतम / न्यूनतम °C · बारिश मिमी और संभावना · बर्फ़ सेमी · हवा किमी/घंटा
मौसम का डेटा: ओपन-मीटियोयह कंप्यूटर मॉडल का अनुमान है, सरकारी चेतावनी नहीं। चेतावनी के लिए मौसम विभाग (IMD) और स्थानीय प्रशासन की सूचना मानें।
यात्रा की तैयारी
कैसे पहुँचें
- ट्रेलहेड
- गंगोत्री
- नज़दीकी रेलवे स्टेशन
- देहरादून (ऋषिकेश और हरिद्वार से भी जा सकते हैं)
- नज़दीकी हवाई अड्डा
- जॉली ग्रांट हवाई अड्डा, देहरादून
- सड़क से
- शुरुआत में देहरादून से गंगोत्री (उत्तरकाशी और हर्षिल होते हुए लगभग 240 किमी); आख़िर में गौरीकुंड से देहरादून या ऋषिकेश (रुद्रप्रयाग होते हुए लगभग 250 किमी)
- गाड़ी से
- देहरादून से लगभग 9 घंटे
यात्रा की तैयारी
परमिट और शुल्क
हम किसी सरकारी स्रोत से मौजूदा परमिट नियम और शुल्क पक्का नहीं कर पाए। जाने से पहले स्थानीय वन विभाग या पर्यटन कार्यालय से पूछ लें।
यात्रा की तैयारी
ख़र्च
ख़ुद से
₹60,000–1,00,000
ऑपरेटर के साथ
₹90,000–1,35,000
प्रति व्यक्ति, देहरादून से (गंगोत्री से शुरुआत, गौरीकुंड पर समापन)। अक्टूबर 2026 में छपी गाइडेड क़ीमतें: हिमालयन ड्रीम ट्रेक्स ₹90,000 + 5% जीएसटी भारतीयों के लिए (विदेशियों के लिए ₹1,50,000), देहरादून-गंगोत्री और गौरीकुंड-देहरादून का सफ़र शामिल नहीं; ग्रेट एडवेंचर ₹93,499, 14 दिन, ऋषिकेश से पिकअप के साथ; बिकट एडवेंचर्स ₹1,25,000 + 5% जीएसटी 2027 के बैचों के लिए, शेयर्ड सूमो या टेम्पो का किराया अलग से। राचो ट्रेकर्स एक लंबा तीन दर्रों वाला रूट (केदारताल और पटांगिनी धार होते हुए) ₹55,000 से चलाता है। ख़ुद से जाने का ख़र्च एक अनुमान है, एक छोटे ग्रुप के लिए जो रस्सी और ग्लेशियर के सामान के साथ एक योग्य स्थानीय गाइड, रसोइया और पोर्टर लगभग 12 ट्रेकिंग दिनों के लिए रखे, साथ में टेंट, खाना, उद्यान शुल्क और दोनों लंबी सड़क यात्राएँ; अनुभवी गाइड के बिना इसे पार करने की सलाह नहीं दी जाती।
सामान
इस ट्रेक के लिए सबसे ज़रूरी सामान
इस रास्ते पर सबसे ज़्यादा काम आने वाला सामान, इसकी ऊँचाई, मौसम और ख़तरों के हिसाब से चुना गया।
विज्ञापन · एफ़िलिएट लिंकमाइक्रोस्पाइक्स (जूतों पर लगने वाले काँटे)
ज़रूरीरास्ते में बर्फ़ और ग्लेशियर
विज्ञापन · एफ़िलिएट लिंक
विज्ञापन · एफ़िलिएट लिंकडाउन या मोटी गद्देदार जैकेट
ज़रूरी4,500 मी से ऊपर: गर्मी में भी तेज़ हवा और ठंड
विज्ञापन · एफ़िलिएट लिंकबालाक्लावा (चेहरा ढकने वाली ऊनी टोपी)
ज़रूरी4,500 मी से ऊपर: गर्मी में भी तेज़ हवा और ठंड
विज्ञापन · एफ़िलिएट लिंक
विज्ञापन · एफ़िलिएट लिंक
विज्ञापन · एफ़िलिएट लिंक
विज्ञापन · एफ़िलिएट लिंक
दुकान वाले बटन उस दुकान पर खोज खोलते हैं, हमारा चुना हुआ कोई सामान नहीं। अमेज़न एसोसिएट के रूप में हम योग्य ख़रीदारियों से कमाई करते हैं। फ़ोटो सिर्फ़ सामान का प्रकार दिखाती हैं, कोई ख़ास प्रोडक्ट नहीं। एफ़िलिएट जानकारी
सामान की सूची
इस ट्रेक के हिसाब से: ऊँचाई, मौसम, दिन और रास्ते के ख़तरे।
34 में से 0 रख लिए
5,490 मी के आसपास गर्मी में भी रात को पारा शून्य के पास जा सकता है। जितना सोचते हैं, उससे एक गर्म कपड़ा ज़्यादा रखें।
बैग में रखते ही हर चीज़ पर निशान लगाएँ।
जाने से पहले जानें
काम की बातें
- मोबाइल नेटवर्क
- गंगोत्री के बाद मोबाइल नेटवर्क ख़त्म हो जाता है; केदारनाथ तक ट्रेक पर कोई सिग्नल नहीं है। ऑपरेटर सैटेलाइट फ़ोन साथ रखते हैं।
- आख़िरी एटीएम
- उत्तरकाशी (वहाँ नक़द कम पड़ सकता है; देहरादून में ही निकाल लें)
- नज़दीकी अस्पताल
- गंगोत्री की तरफ़ उत्तरकाशी में ज़िला अस्पताल; गंभीर मामलों में एम्स ऋषिकेश। ग्लेशियर से निकलने का एकमात्र रास्ता पोर्टरों द्वारा उठाकर नीचे लाना या हेलीकॉप्टर से निकासी है।
- पानी
- हर कैंप पर ग्लेशियर की धाराएँ और पिघली बर्फ़ का पानी, और मसर ताल व वासुकी ताल की झीलें; सारा पानी छानकर या साफ़ करके पिएँ।
ख़ास बातें
- ऑडेन्स कॉल (5,490 मी) पार करना, गंगोत्री और जोगिन पर्वत-समूहों के बीच का वह दर्रा जिसे भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के जे.बी. ऑडेन ने 1935 में खोजा था
- पूरे खतलिंग ग्लेशियर के साथ-साथ नीचे उतरकर दूर-दराज़ की ऊपरी भिलंगना घाटी में पहुँचना
- भागीरथी के उद्गम गंगोत्री से श्री केदारनाथ धाम तक की सच्ची आर-पार यात्रा, जिसमें मयाली पर एक दूसरा दर्रा भी पार होता है
- मसर ताल और केदारनाथ के ऊपर वासुकी ताल (गंगोत्री के पास वाले वासुकी ताल से अलग झील) की ऊँची झीलों पर कैंप, फिर नीचे उतरकर श्री केदारनाथ मंदिर तक पहुँचना
जोखिम
- कॉल पर और खतलिंग ग्लेशियर पर छिपी हुई दरारें: गाइड के पीछे रस्सी बाँधकर चलें; ऑपरेटरों के अनुसार उतराई चढ़ाई से ज़्यादा मुश्किल है।
- दर्रे वाला दिन 5,000-5,490 मी की ऊँचाई पर बर्फ़ और हिम पर 10-12 घंटे का होता है; मौसम जल्दी बदलता है और एक अतिरिक्त दिन रखना ज़रूरी है। अक्टूबर 2022 में इसी गंगोत्री क्षेत्र में पास के द्रौपदी का डांडा II पर हिमस्खलन में प्रशिक्षु पर्वतारोहियों की जान गई थी।
- गंगोत्री और केदारनाथ के बीच लंबे हिस्से में न नेटवर्क है, न सड़क; ग्लेशियर से निकासी में समय लगता है।
- मानसून (जुलाई-अगस्त) में भिलंगना की तरफ़ बारिश, नीचे तक बादल और उफनती धाराएँ होती हैं; ज़्यादातर ऑपरेटर तब यह ट्रेक नहीं चलाते।
- ऊँचाई तेज़ी से 4,700 मी से ऊपर पहुँचती है; गंगोत्री और रुद्रगैरा पर अनुकूलन के दिन ज़रूरी हैं।
जाने से पहले जानें
सवाल-जवाब
ऑडेन्स कॉल ट्रेक कितना कठिन है?
यह गढ़वाल के सबसे कठिन ट्रेकिंग दर्रों में से एक है। 5,490 मी ऊँचे कॉल पर खड़ी बर्फ़ और हिम है, और इसके नीचे के खतलिंग ग्लेशियर में दरारें हैं, इसलिए रस्सी, क्रैम्पॉन और गाइड चाहिए। ऑपरेटर इसे कठिन बताते हैं (बिकट: BRS 6) और पहले के ऊँचाई वाले ट्रेक का अनुभव माँगते हैं।
क्या ऑडेन्स कॉल के लिए पर्वतारोहण का प्रशिक्षण चाहिए?
ऑपरेटर पर्वतारोहण का औपचारिक प्रशिक्षण नहीं माँगते, लेकिन पहले किए गए कठिन ऊँचाई वाले ट्रेक और बर्फ़ पर चलने के अनुभव की पक्की सलाह देते हैं। आपको ग्लेशियर पर क्रैम्पॉन पहनकर रस्सी से बँधकर चलने में सहज होना चाहिए।
ऑडेन्स कॉल जाने का सबसे अच्छा समय कब है?
मई के आख़िर से जून तक, और सितंबर से अक्टूबर के बीच तक। गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान 30 नवंबर से 31 मार्च तक बंद रहता है, मानसून की बारिश से जुलाई और अगस्त जोखिम भरे होते हैं, और बर्फ़ आम तौर पर अक्टूबर के बीच से गिरने लगती है।
ऑडेन्स कॉल होते हुए गंगोत्री से केदारनाथ ट्रेक में कितने दिन लगते हैं?
ऑपरेटर देहरादून या ऋषिकेश से 14 से 16 दिन का ट्रेक चलाते हैं, जिसमें अनुकूलन के दो दिन, ग्लेशियर के बाद आराम का एक दिन और अक्सर एक अतिरिक्त दिन शामिल होता है। पैदल दूरी लगभग 75-95 किमी है, जो केदारनाथ और गौरीकुंड पर ख़त्म होती है।
क्या रास्ते में मोबाइल नेटवर्क या एटीएम मिलता है?
नहीं। गंगोत्री के बाद नेटवर्क ख़त्म हो जाता है और केदारनाथ पहुँचकर ही लौटता है। आख़िरी एटीएम उत्तरकाशी में है, इसलिए देहरादून से नक़द लेकर चलें।
क्या ऑडेन्स कॉल के लिए परमिट चाहिए?
हाँ। ट्रेक गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान में शुरू होता है, जिसके लिए उद्यान कार्यालय (उत्तरकाशी या गंगोत्री का वन कार्यालय, या ऑनलाइन पोर्टल) से प्रवेश परमिट लेना होता है। गाइडेड ग्रुप की क़ीमत में परमिट शामिल रहते हैं। हमें इस रास्ते का मौजूदा सरकारी शुल्क नहीं मिला, इसलिए जाने से पहले गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान कार्यालय से पता कर लें।
आपात स्थिति में
नेटवर्क जाने से पहले ये नंबर सेव कर लें। कॉल करने के लिए दबाएँ।
- 112हर आपात स्थितिभारत का एक ही आपातकालीन नंबर — हर राज्य में चलता है
- 108एंबुलेंस
- 1077ज़िला आपदा नियंत्रण कक्ष
आप यहाँ हैं
ज़िला: उत्तरकाशी, टिहरी गढ़वाल और रुद्रप्रयागउत्तराखंड
- सबसे नज़दीकी अस्पताल
- गंगोत्री की तरफ़ उत्तरकाशी में ज़िला अस्पताल; गंभीर मामलों में एम्स ऋषिकेश। ग्लेशियर से निकलने का एकमात्र रास्ता पोर्टरों द्वारा उठाकर नीचे लाना या हेलीकॉप्टर से निकासी है।
- आख़िरी एटीएम
- उत्तरकाशी (वहाँ नक़द कम पड़ सकता है; देहरादून में ही निकाल लें)
- फ़ोन नेटवर्क
- गंगोत्री के बाद मोबाइल नेटवर्क ख़त्म हो जाता है; केदारनाथ तक ट्रेक पर कोई सिग्नल नहीं है। ऑपरेटर सैटेलाइट फ़ोन साथ रखते हैं।
निकलने से पहले
- किसी को अपना रास्ता और लौटने का समय बताकर जाएँ।
- फ़ोन पूरा चार्ज रखें और पावर बैंक साथ लें।
- रास्ते का ऑफ़लाइन नक्शा डाउनलोड कर लें।
- मौसम बिगड़े तो लौट आएँ — पहाड़ कहीं नहीं जाएगा।
ऑडेन्स कॉल के बारे में सवाल
अभी कोई सवाल नहीं है। कुछ पूछें, जो लोग यह ट्रेक कर चुके हैं वे जवाब दे सकते हैं।
अपनी ट्रेक की तस्वीर #TreksAndTrails के साथ डालें
मैंने यह ट्रेक किया है
क्या ऑडेन्स कॉल इस पेज से अलग दिखा? बताइए क्या बदला है, हम जाँच करेंगे।
जानकारी कहाँ से ली गई
स्रोत
आख़िरी जाँच:
- Auden's Col Expedition — Bikat Adventures
- Auden's Col Trek with Mayali Pass — Himalayan Dream Treks
- Auden's Col Expedition (5,490 M) — Great Adventure
- Auden's Col & Mayali Pass Trek (Across Khatling Glacier) — Raacho Trekkers
- Auden's Col — Wikipedia
- Gangotri National Park Reopens For Trek: Date, Permits, And What Travellers Need To Know — Outlook Traveller
- Gangotri National Park and Gartang Valley Close for Winter After Record-Breaking Season — Modern Campground
फ़ोटो: Arpit Rawat, CC0



