कब्बालदुर्ग ट्रेक
बेंगलुरु दक्षिण, पहले रामनगर (कनकपुरा तालुक), कर्नाटक
इस फ़ोन पर बिना नेटवर्क के खुलेगा, नक्शे की फ़ाइल और सूची के साथ। ऑफ़लाइन सहेजे गए →
- सबसे ऊँचा बिंदु
- 1,067 मी
- दिन
- 1 दिन
- दूरी
- 2.8 किमी
- कठिनाई
- मध्यम
छोटा है, एक तरफ़ लगभग 1.1 किमी, लेकिन ज़्यादातर चढ़ाई खड़ी, नंगी ग्रेनाइट चट्टान पर है (कहीं-कहीं 45 से लगभग 80 डिग्री तक), जहाँ चट्टान में कटे उथले पायदान, लोहे की सरिया के लगे हुए हत्थे और ज़ंजीरें सहारा देते हैं; उतरना सबसे कठिन हिस्सा है और गीली होने पर चट्टान फिसलन भरी हो जाती है।
तस्वीरें
रास्ते की झलक
रास्ता
दिन-ब-दिन
दिन 1 · सबसे ऊँचा बिंदु
कब्बालु गाँव → कब्बालु गाँव (कब्बालदुर्ग क़िले के शिखर होते हुए)
730 मी → 1,067 मी → 730 मी
चढ़ाई और उतराई
ऊँचाई का ग्राफ़
कहाँ है
नक्शा
सिर्फ़ शुरुआत और सबसे ऊँची जगह के निशान — पूरा रास्ता नहीं। इसे किसी अच्छे नक़्शे के साथ ही इस्तेमाल करें।
मौसम
रास्ते पर अगले 5 दिन का मौसम
ट्रेक शुरू होने की जगह और सबसे ऊँची जगह का ताज़ा पूर्वानुमान। पहाड़ में मौसम जल्दी बदलता है — निकलने वाले दिन सुबह फिर से देखें।
शुरुआत · कब्बालु (कब्बाल) गाँव
730 मी परपूर्वानुमान आ रहा है…
सबसे ऊँची जगह · कब्बालदुर्ग क़िले का शिखर (कब्बालम्मा देवी मंदिर)
1,067 मी परपूर्वानुमान आ रहा है…
हर दिन: अधिकतम / न्यूनतम °C · बारिश मिमी और संभावना · बर्फ़ सेमी · हवा किमी/घंटा
मौसम का डेटा: ओपन-मीटियोयह कंप्यूटर मॉडल का अनुमान है, सरकारी चेतावनी नहीं। चेतावनी के लिए मौसम विभाग (IMD) और स्थानीय प्रशासन की सूचना मानें।
यात्रा की तैयारी
कैसे पहुँचें
- ट्रेलहेड
- कब्बालु (कब्बाल) गाँव (नज़दीकी क़स्बा: कनकपुरा)
- नज़दीकी रेलवे स्टेशन
- चन्नपटना (सातनूर होते हुए लगभग 28-30 किमी)
- नज़दीकी हवाई अड्डा
- केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, बेंगलुरु
- सड़क से
- बेंगलुरु (लगभग 80-90 किमी): कनकपुरा रोड से कनकपुरा, फिर सातनूर की ओर और दाएँ मुड़कर कब्बालु रोड; बेंगलुरु से मैसूर रोड होते हुए (बिडदी, रामनगर, चन्नपटना, फिर बाएँ मुड़कर सातनूर और कब्बालु; चन्नपटना से लगभग 28 किमी); सातनूर (ऑटो-रिक्शा से 6 किमी; बेंगलुरु से मलवल्ली या कोल्लेगाल जाने वाली KSRTC बसें सातनूर रुकती हैं)
- गाड़ी से
- बेंगलुरु से लगभग 2 घंटे
यात्रा की तैयारी
परमिट और शुल्क
हम किसी सरकारी स्रोत से मौजूदा परमिट नियम और शुल्क पक्का नहीं कर पाए। जाने से पहले स्थानीय वन विभाग या पर्यटन कार्यालय से पूछ लें।
यात्रा की तैयारी
ख़र्च
ख़ुद से
₹400–1,200
ऑपरेटर के साथ
₹1,250–1,300
प्रति व्यक्ति, बेंगलुरु से, एक दिन की यात्रा। गाइड के साथ के दाम, अक्टूबर 2026 में देखे गए: मडी ट्रेल्स का सूर्योदय ट्रेक ₹1,250 से (पहले ₹1,700 था); ट्रेक्स एंड ट्रेल्स इंडिया (इस साइट से इसका कोई संबंध नहीं) ₹1,300, जिसमें नॉन-AC गाड़ी, नाश्ता और पैक्ड लंच शामिल है। बीएमसी एडवेंचर्स सूर्योदय और कैंपिंग ट्रिप चलाता है, जिनका दाम पूछने पर बताया जाता है, साथ में GST। बिना गाइड का दाम अनुमान है: बेंगलुरु–सातनूर आने-जाने की KSRTC बस, कब्बालु तक ऑटो-रिक्शा (6 किमी) और खाना, या शेयर्ड कार का पेट्रोल।
सामान
इस ट्रेक के लिए सबसे ज़रूरी सामान
इस रास्ते पर सबसे ज़्यादा काम आने वाला सामान, इसकी ऊँचाई, मौसम और ख़तरों के हिसाब से चुना गया।
विज्ञापन · एफ़िलिएट लिंक
विज्ञापन · एफ़िलिएट लिंक
विज्ञापन · एफ़िलिएट लिंकमंदिर दर्शन के लिए सादे, ढके कपड़े
ज़रूरीतीर्थ यात्रा: मंदिरों में सादे कपड़े पहनें
विज्ञापन · एफ़िलिएट लिंक- विज्ञापन · एफ़िलिएट लिंक
विज्ञापन · एफ़िलिएट लिंक
विज्ञापन · एफ़िलिएट लिंक
विज्ञापन · एफ़िलिएट लिंकटखने को सहारा देने वाले ट्रेकिंग जूते
ज़रूरीमध्यम रास्ता: पकड़ और टखने का सहारा
दुकान वाले बटन उस दुकान पर खोज खोलते हैं, हमारा चुना हुआ कोई सामान नहीं। अमेज़न एसोसिएट के रूप में हम योग्य ख़रीदारियों से कमाई करते हैं। फ़ोटो सिर्फ़ सामान का प्रकार दिखाती हैं, कोई ख़ास प्रोडक्ट नहीं। एफ़िलिएट जानकारी
सामान की सूची
इस ट्रेक के हिसाब से: ऊँचाई, मौसम, दिन और रास्ते के ख़तरे।
18 में से 0 रख लिए
मार्च में दिन गर्म: पौ फटते ही चलना शुरू करें, पानी और ORS ज़्यादा रखें।
बैग में रखते ही हर चीज़ पर निशान लगाएँ।
जाने से पहले जानें
काम की बातें
- मोबाइल नेटवर्क
- हाल में पुष्टि नहीं हुई; 2003 की एक यात्रा रिपोर्ट में मोबाइल सिग्नल सिर्फ़ शिखर के मंदिर पर मिला था। चढ़ाई में नेटवर्क आता-जाता रहेगा, यह मानकर चलें।
- आख़िरी एटीएम
- कनकपुरा शहर (नकद साथ रखें; कब्बालु छोटा-सा गाँव है)
- नज़दीकी अस्पताल
- प्राथमिक इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, सातनूर (6 किमी); गंभीर मामलों के लिए सरकारी जनरल अस्पताल, कनकपुरा
- पानी
- रास्ते में कहीं पानी नहीं। शिखर पर बारिश के पानी से भरा चट्टानी तालाब पीने लायक नहीं है। हर व्यक्ति कम से कम 2 लीटर पानी साथ रखे।
ख़ास बातें
- ग्रेनाइट की विशाल एकाश्म चट्टान पर हाथों-पैरों के बल चढ़ाई: चट्टान में कटे पायदान, स्टील की रेलिंग वाली सीढ़ियाँ और लगी हुई ज़ंजीरें
- बेंगलुरु के आसपास के पहाड़ी क़िलों में से एक, कब्बालदुर्ग के खंडहर, जिसे मैसूर के शासकों और हैदर अली के समय में जेल की तरह इस्तेमाल किया गया; गुत्ती के मुरारी राव घोरपड़े को यहीं क़ैद रखा गया था
- शिखर पर कब्बालम्मा देवी के छोटे मंदिर में दर्शन; यह आज भी जीवंत तीर्थ है, जहाँ भक्त अब भी चढ़कर आते हैं, उनमें से बहुत-से नंगे पैर
- समतल शिखर पर बारिश के पानी से भरा चट्टानी तालाब और कनकपुरा की पथरीली पहाड़ियों व खेतों का 360° नज़ारा, साथ में ऊपर से सूर्योदय
जोखिम
- खड़ी, खुली ग्रेनाइट चट्टान, जिसके नीचे लंबी ढलान है और कई जगह गिरने पर रोकने को कुछ नहीं; अच्छी पकड़ वाले जूते ज़रूरी हैं और उतरते समय सबसे ज़्यादा सावधानी चाहिए। बारिश में या बारिश के तुरंत बाद, जब चट्टान फिसलन भरी हो, चढ़ाई न करें।
- चढ़ाई के ज़्यादातर हिस्से में न छाँव है न पानी, और चट्टान जल्दी गरम हो जाती है; सूर्योदय से पहले निकलें और गर्मियों की दोपहर में न जाएँ।
- वन विभाग की स्थिति: इंडियाहाइक्स (सितंबर 2026 में अपडेट) के अनुसार किसी परमिट या बुकिंग की ज़रूरत नहीं, लेकिन एक ऑपरेटर अपने पैकेज में 'वन विभाग से अनुमति' लिखता है। तेंदुए के एक जानलेवा हमले के बाद कर्नाटक के मुख्य वन्यजीव संरक्षक के 11 मई 2026 के परिपत्र ने तेंदुए, बाघ, हाथी और भालू वाले इलाक़ों में जंगल के रास्तों पर ट्रेकिंग तब तक के लिए रोक दी, जब तक हर रास्ते को सुरक्षित प्रमाणित न किया जाए; बिना गाइड चढ़ने से पहले कब्बालु में या कनकपुरा वन रेंज में स्थानीय स्तर पर पता कर लें।
- रास्ता संकरा है और तीर्थयात्रियों के साथ साझा है, जिनमें बहुत-से नंगे पैर चढ़ते हैं; उन्हें रास्ता दें और तय रास्ते पर ही रहें। बेस के पास की पार्किंग पर कोई निगरानी नहीं है।
जाने से पहले जानें
सवाल-जवाब
क्या कब्बालदुर्ग ट्रेक के लिए परमिट चाहिए?
इंडियाहाइक्स (सितंबर 2026 में अपडेट) के अनुसार एक दिन के ट्रेक के लिए न वन विभाग का परमिट चाहिए, न पहले से बुकिंग; आप फ़ोटो पहचान पत्र लेकर सीधे कब्बालु गाँव से चढ़ाई शुरू कर सकते हैं। कब्बालदुर्ग कर्नाटक वन विभाग की अरण्य विहार बुकिंग सूची में नहीं है। मई 2026 के एक राज्यव्यापी परिपत्र ने जंगल के कुछ ट्रेक रोक दिए थे, इसलिए जाने से पहले स्थानीय स्तर पर पता कर लें कि कोई अस्थायी रोक तो नहीं।
कब्बालदुर्ग ट्रेक कितना लंबा और कितना कठिन है?
इंडियाहाइक्स के अनुसार एक तरफ़ लगभग 1.1 किमी (आना-जाना मिलाकर 2.5 किमी) है और मडी ट्रेल्स 3 किमी बताता है; कुछ ऑपरेटर गाँव से आने का रास्ता जोड़कर 5-6 किमी बताते हैं। चढ़ाई में 60-90 मिनट और पूरे ट्रेक में 3-4 घंटे लगते हैं। इसे दूरी की वजह से नहीं, बल्कि कटे पायदानों, हत्थों और ज़ंजीरों वाली खड़ी ग्रेनाइट चट्टानों की वजह से मध्यम दर्जे का माना गया है।
क्या नए ट्रेकर कब्बालदुर्ग चढ़ सकते हैं?
इंडियाहाइक्स और मडी ट्रेल्स के अनुसार फ़िट नए ट्रेकर चढ़ सकते हैं, लेकिन यह जंगल की सैर से एक कदम आगे है: कई हिस्सों में चिकनी ढलवाँ चट्टान पर हाथों का सहारा लेना पड़ता है, और उतरते समय, ख़ासकर चट्टान गीली होने पर, ज़्यादा सावधानी चाहिए।
कब्बालदुर्ग के लिए सबसे अच्छा समय कौन-सा है, और क्या यह रात में किया जा सकता है?
अक्टूबर से मार्च सबसे अच्छा है (10-25 °C)। इंडियाहाइक्स के अनुसार यह साल भर किया जा सकता है और मडी ट्रेल्स के अनुसार गर्मियों की तेज़ दोपहर को छोड़कर हर मौसम में; मानसून की बारिश चट्टान को फिसलन भरा बना देती है और गर्मियों की दोपहर बहुत गरम होती है। सूर्योदय ट्रेक लोकप्रिय हैं: ऑपरेटर सुबह लगभग 3-4 बजे बेस पहुँचते हैं और हेडलैंप की रोशनी में अँधेरे में चढ़ते हैं।
बेंगलुरु से कब्बालदुर्ग कैसे पहुँचें?
कनकपुरा रोड और सातनूर होते हुए कब्बालु गाँव तक लगभग 80-90 किमी (करीब 2 घंटे) की ड्राइव है। बस से जाना हो तो मलवल्ली या कोल्लेगाल की ओर जाने वाली KSRTC बस लें, सातनूर उतरें और वहाँ से 6 किमी ऑटो-रिक्शा से कब्बालु जाएँ।
क्या रास्ते में पानी या खाना मिलता है?
नहीं। रास्ते में न खाने की दुकानें हैं, न पीने का पानी, और बेस पर कोई शौचालय नहीं है। कम से कम 2 लीटर पानी और कुछ नाश्ता साथ रखें; शिखर के तालाब का पानी पीने लायक नहीं है।
आपात स्थिति में
नेटवर्क जाने से पहले ये नंबर सेव कर लें। कॉल करने के लिए दबाएँ।
- 112हर आपात स्थितिभारत का एक ही आपातकालीन नंबर — हर राज्य में चलता है
- 108एंबुलेंस
- 1077ज़िला आपदा नियंत्रण कक्ष
आप यहाँ हैं
ज़िला: बेंगलुरु दक्षिण, पहले रामनगर (कनकपुरा तालुक)कर्नाटक
- सबसे नज़दीकी अस्पताल
- प्राथमिक इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, सातनूर (6 किमी); गंभीर मामलों के लिए सरकारी जनरल अस्पताल, कनकपुरा
- आख़िरी एटीएम
- कनकपुरा शहर (नकद साथ रखें; कब्बालु छोटा-सा गाँव है)
- फ़ोन नेटवर्क
- हाल में पुष्टि नहीं हुई; 2003 की एक यात्रा रिपोर्ट में मोबाइल सिग्नल सिर्फ़ शिखर के मंदिर पर मिला था। चढ़ाई में नेटवर्क आता-जाता रहेगा, यह मानकर चलें।
निकलने से पहले
- किसी को अपना रास्ता और लौटने का समय बताकर जाएँ।
- फ़ोन पूरा चार्ज रखें और पावर बैंक साथ लें।
- रास्ते का ऑफ़लाइन नक्शा डाउनलोड कर लें।
- मौसम बिगड़े तो लौट आएँ — पहाड़ कहीं नहीं जाएगा।
कब्बालदुर्ग के बारे में सवाल
अभी कोई सवाल नहीं है। कुछ पूछें, जो लोग यह ट्रेक कर चुके हैं वे जवाब दे सकते हैं।
अपनी ट्रेक की तस्वीर #TreksAndTrails के साथ डालें
मैंने यह ट्रेक किया है
क्या कब्बालदुर्ग इस पेज से अलग दिखा? बताइए क्या बदला है, हम जाँच करेंगे।
जानकारी कहाँ से ली गई
स्रोत
आख़िरी जाँच:
- Kabbaladurga Trek: Complete DIY Guide from Bengaluru — Indiahikes
- 10 Best treks around Bangalore — Muddie Trails
- Kabbaladurga Sunrise Trek — Muddie Trails
- KabbalaDurga Trek from Bangalore — Treks and Trails India (treksandtrails.org)
- Camping & Trekking in Kabbaladurga — BMC Adventures (Bangalore Mountaineering Club)
- Trip to Kabbal Durga and Bandalli - Hemant Murthy — Dreamroutes (trip report)
- Kabbaldurga — Wikipedia
फ़ोटो: solarisgirl / Flickr, CC BY-SA 2.0; solarisgirl / Flickr, CC BY-SA 2.0; solarisgirl / Flickr, CC BY-SA 2.0



